Book Title: Mahabharatam
Author(s): Nagsharan Sinh,
Publisher: Nag Prakashan Delhi
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श्रीमन्महाभारतम् :: श्लोकानुक्रमणी
७२६
श्रुत्वा तु वचनं तेषां (माश्व) ६५.२ श्रुत्वा घमिष्ठमा स्यान् (मा) ५८३२ श्रुत्वा वचः स मुनी (वन) १६२.७२ श्रुत्वा सूतस्तद्वचो (समा) ६७.१७ श्रुत्वा तु वचनं तेषा (गल्य)२५.४७ त्या धर्मानशेषण (अन) १४६.१ थत्वा वच: सदेवस्य (वन) ७१.१ श्रुत्वा स्वरं द्वारगतस्य (वन) २३४.६ श्रुत्वा तु वचनं त्वत्तो (शल्य) ३५.६८ श्रुत्दा नागपुरे नणाम (आ) १२६.१२ श्रुत्वारण्ये विलपितं न (वन) ६४.३६ श्रुत्वा हत रुक्मरथं (द्रोण) १८ श्रुत्वा तु वचनं देवः (शति) २५७.१३ श्रुत्वा निनाद त्वथ (शल्य) २०.११ श्रुत्वा वा श्रोतुरामो (अनु) १४८.५२ श्रुत्वा हि घृतरराष्ट्रम्य(शांति) १२४.७ श्रुत्वा तु वचनं भीष्मो (शांति)५१.१ श्रुत्वा निनादं धनुषश्च (द्रोण) १४६.१ श्रुत्वा विनष्टान् वाणयान (मो) ५.२ श्रुत्वा हि वचनं देव: (द्रोण) ५३.१५ श्रुत्वा तु वाक्यानि (आ) १९४.४ थत्वा पतींश्च पुत्राश्च (शल्य) २७.२४ श्रुत्वा वीरविहीनानाम(शाति) २५.३ थत्वा ह्यहमयं चंब (कर्ण) ७१.२६ श्रुत्वा तु विविधान् (आश्व) ३०.१८
श्रुत्वा पाण्डुसुतान्वीर (आ) १४०.१ श्रुत्वा वैवस्वतवचस्तमहं (अनु) ७१.३७ श्रुत्वा हमरसंकाश तब (आ) १६५.७ श्रुत्वा तु शल्यवचनं (उद्योग) १८.२२
श्रुत्वाऽपि परुषं वाक्यं (भीष्म)८४.५२ श्रुत्वा व्यामोहमागच्छ (कर्ण) ७.२६ धूत्वेतिहासं नृपते (वन) ७६.१३ श्रुत्वा तु सर्पसत्राय दीक्षितं(आ)६०.१ श्रुत्या पुत्रस्य तु वचः(शांति) ३२५.३ था शकुनिना द्यूते (भा) २.१५१ श्रुत्वेतिहास भीष्मोक्तं (अनु)२६.१०५ श्रुत्वा तेभ्यस्ततः सर्वं (आ) १६.४५ श्रुत्वा बहुविधैः शब्दै (वन) १६१.१ श्रुत्वा शंखस्य निर्घोषं (द्रोण) १३.१७
श्रुत्वेमां धर्मसंयुक्ता (वन) २१७.१ श्रुत्वाऽथ तस्य तं ५ ब्दं (आ) ७१.३
थुत्वा भवत्सकाशाद्धि पितु(आ)४६.४ अत्या शब्दं तु यं (वन) २६५.४ श्रुत्वरित केशवस्य (वन) २६३.४५ श्रुत्वा त्वत्तो भूगोभार्या (आ) ५.२६
श्रुत्वा भारतसिंहस्य (बा) ११६.४२ श्रुत्वा श्येनस्य तद्वाक्यं (अनु) ३२.१७ श्रुत्वैतत्प्रस्थितो राजा (वन) ७४.६ श्रुत्वा त्व वरं दाश (आ) १००.५५
श्रुत्वाभिमन्योस्तनयं (आश्व) ६७.६ श्रुत्वा स कटुका वाचो (शल्य) ३२८ त्वं तदप्रियं राजा (कर्ण) ९६.५४ श्रुत्वा त्वं सुहृदां (शांति) १३८.२१४
श्रुत्वा भीष्मस्य (उद्योग) १६३.१५ श्रुत्वा स तस्या विपुलं (आश्व)६६१६ श्रुत्वैतदेवदेवस्य (शांति) ३४०.५४ श्रुत्वा त्विदमुपाख्यानं (आ) २.३८४
श्रुत्वा भीष्मस्य निधनम (दोण) १.८ थत्वा स निनदं घोरम(भीष्म) ९५.५३ श्रुत्वैतद्धर्मराजस्य (उद्योग) १५४.६ श्रुत्वा दम्पतिधर्म वै (अनु) १४६.३६
धुत्वा महान्तं तं (द्रोण) १४६.१३८ श्रुत्वा स निनदं भीम (द्रोण) ११४.३ बत्वतद्धर्मराजस्य भीमो(बन)२५६.१५ श्रुत्वा दुर्योधनो वाक्य (उद्योग)१२७.१
श्रुत्वा माहात्म्यमेतस्य(शांति) ३४०.६ श्रुत्वा स राजा राजषि (वन) २००.१ श्रुत्वतद्भवतां वाक्यं (आ) १०.४८ श्रुत्वा दृष्ट्वाऽथ (उद्योग) २६.४३ श्रुत्वा मृत्युसमुत्पत्ति (दोण) ५५.१ श्रुत्वा सर्वाणि सैन्यानि (द्रोण) ३.२० श्रुत्वंतद्वचनं राज्ञो (आश्व) ६४.१३ श्रुत्वा द्वैपायनवचो (आश्व) ६३.३ श्रुत्वा यथेष्ट च कुरु (कर्ण) १०.२३ श्रुत्वा स विजयं तस्य (विरा) ६८.२२ श्रुत्वैतद्वचनं वह्यन् (आश्व) ६२.१ श्रुत्वा दुर्योधनस्तत्र (शांति) ४.४
श्रुत्वा राज्ञस्तदा (आश्रम) श्रुत्वा राशस्तदा आश्रम)
३७.३७ श्रुत्वा सुहृदचस्तञ्च (सभा) १३:२८ श्रुत्वतद्वचनं शक्रः (आ) ३०.४३
श्रुत्वतदनं शक्रो दानवेन्द्र (बनु)३६.१६ बुत्वतन्वारदो वाक्यं (शांति) ३४६.१ श्रुत्वंतत्वाह विघ्नेशो (आ) १.७० अत्वैव च महाबाहु (आ) २१३.१२ बुत्वैव च स राजानं (आ) ८१.२६ श्रुत्वैव चाहं राजेन्द्र (वन) १३.१६ श्रुत्वव तु महाशब्दं (शल्य) १.३९ श्रुत्वव पार्थमायान्तं (कर्ण) ७७.२४ श्रुत्वैवमृषिपुत्रस्तु (आ) ४१.१० श्रुत्वव हि गतं विष्णु (मो) ८.२४ श्रुत्वैवं कोरवो राजा (महा) १.२ श्रुत्वैवं तु महाराज (द्रोण) १६०.४९ श्रुत्वैवं धर्मराजस्य (शांति) ४६.३१ धृतवानसि मेधावी (आ) १.२४ शूद्रयोन्यां वर्तमानो (वन) २१६.४ श्रूयतामवनीपाल (शांति) ३१०.५
यतां च चाभिधास्याति(वन)२.२० श्रूयतां चापरं गुह्य (अनु) १२५.५३ श्र यता चापरं गुह्य (अनू) १२६.५ धूयतां चापरो धर्मः (अनु) १२६॥
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