Book Title: Mahabharatam
Author(s): Nagsharan Sinh, 
Publisher: Nag Prakashan Delhi

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Page 717
________________ श्रीमन्महाभारतम् ।। श्लोकानुगमणी ७१२ धरान्नानाविधान्मुक्त्वा (कर्ण) ७४.३१ शरास्तयोस्तु विवभुः (विरा) ५८४३ शरीरमिह सत्वेन न (अनु) ४८.४७ शरीर च जहात्येब (आश्व) १७.२३ शीरेण कृतं पापं (आ) ६२.२५ शरान्पञ्चाशतस्ता (द्रोण) १७१.२१ शरास्तु कर्णार्जुनबाहु (कर्ण) १४.१२ शरीरमुत्सृजेत्तत्र विधिपूर्व (अनु।२५६३ शरीरं च मृतस्यक (विरा) ५.३१ शरीरेणासमग्रेण तस्माद् (आ) १६.१६ शरान् विचित्रान् (द्रोण) ३८.२२ शरास्त्रवृष्टया निहतो(विरा) ५४.३३ शरीरमेतौ कुरुतः पिता(उद्योग)४४.८ शरीरं तु न पश्यामि(उद्योग) ११२.३ शरीरे मा च संतापं (शांति) १४५.१३ शराभिघातदुःखात्ते (शांति) ५०.१४ शराहता भिन्नदेहा (भीष्म) ७१.३३ शरीरशेवायतनं (शांति) १७४.२१ शरीरं पुरमित्याहः (शांति) २५४.६ शरीरे सोमदत्तस्य स (द्रोण) १५७.११ शराभिघाताच्ज रुषा च (कर्ण) ८४.२२ शराहताना पतता (द्रोण) १७६.३० शरीरं योक्तुमिच्छामि (अनु) ५७५ शरीरं यदवाप्नोति (भीष्म). ३६.८ शरीरैरपरे दीप्तदेहवन्त (आ)२२६.१० शरभितापाव्यथितं (शांति) ५२.६ शराहता भिन्नदेहा (भीष्म) ७१.३४ शरीरलिज रूपसूचितो (विरा) ७.७ शरीरं यस्य निर्देष्ट (वन) १२४.२० शरीरबहुधा छिन्नैः (कर्ण) १६.३५ शराचियं गाण्डिव (कर्ण) ७६.७६ शरीरकृत्प्राणदाता (आ) ७२.१५ शारीरखांस्तानि कर्याद (शांति ३२.२५ शरीर शरीरवांस्तानि कुर्याद (शांति)३२.२५ शरीरं वर्जयन्त्येते (अनु) १११.२४ गरेण कार्तस्वभूषितेन (शल्य) २८.६२ शराचिरदहत कुद्धः द्रोण) ६३.५८ शरीरबृहसंशस्य (शांति) २६८.३६ शरीरवाङ भनोभियंत (भीष्म) ४२.१५ शरीरं वासुदेवस्य रामस्य(आ)२.३५६ गरेण विद्धा मुद्रां तामूवं (आ)१३१.३२ शराचिषा गण्डिवेन (द्रोण) ७४.५६ शरीरग्रहणं चास्य (आश्व) १८.२४ शरीरवा जटी भत्या (आ)२२८.४१ शरीर श्रयणाद्भवति(शांति)२३२.१२ शरेणादित्यवर्णेन (अनु) १६०.३१ शरातविद्वतन गः (द्रोण) १९६.१६ शरीरधातवो ह्यस्य (वन) २६०.३३ शरीरवानपादत्ते मोहात (शांति)२१२.४ शरीरग्नि शूराणां (स्त्री) २.१७ शरः कनकपुरच चित्रा(कर्ण)५२.१७ शरार्ता न जहुद्रोणं (द्रोण) ३२.४० शरीरनिचयं ज्ञातु (अनु) १११.२० शरीरवत्तमास्थाय (शांति) ७९.१६ शरीराग्निषु शूराणां (स्त्री) ६.२० शरैः कदम्बकीकृत्य(द्रोण) १४६.१२४ शरात विद्रुत गैहः (द्रोण) १९६.१६ शरीरनियमं प्राहुः (वन)९३.२४ शरीरशतसम्बाधां (द्रोण) १४.१५ शरीराणि विमोक्ष्या (शांति) ३३.१२ शरैः कनमपुखश्च (भीष्म) ११६.३ शरीरशतसंबाधा (द्रोण) १४.१९ शरीराणि व्यदृश्यन्त (कर्ण) २७.३६ शरैः कृत्ता महेष्वास (कर्ण) ७१.१५ शरावतीं पयोष्णी च (भीष्म) ६.२० शरीरपक्तिः कर्माणि (शांति)२७०.३८ शरीरक्षित स्नातस्य (वन) ८३.४३ शरीराद्विप्रमुक्तं हि (शांति) २५३.१ शरैः पञ्चाशता वीरः(द्रोण) १४५.६७ परावमदं शीवत्वात् (वन) २७.२५ शरीरभदगार्हपत्यः (आश्व) २१.८ शरीरस्थानि तीर्थानि (अन) १०८.१५ शराराविविवारवान्यविना २२२.१५ शरः परमसंक्रडो (भीष्म) ४८.४४ शराश्च क्षयमापन्ना (मो) ८.१९ शरीरभेदादिसमुच्छयं (आ) १०.१३ गरीरस्य ययोद्देशाः (अनु) १०८.१६ टोरिसमय आ ग रस्य ययोरेशाः अन शरीरान्निः सृतस्तस्य(शांति) १२४.५० : शरैः पूर्णायतोत्सृष्ट (कर्ण) १५.२१ शराश्च दैत्यकायेषु (बन) २३१.७४ शरीरमपि राजेन्द्र तस्य शांति) १२७८ शरीरस्य विमोक्षेण (शांति) ४६.२१ ॥ शरीरान्तिः सृतस्तस्य (शांति) १२४.५२ शरः पूर्णायतोत्सृष्टं (द्रोण) १३३.३२ शराश्चनिशिताः (भीष्म) १००.१४ शरीरमात्मनः कृत्वा (आश्व) १५.२५ शरीरसङ्गातबहा (द्रोण) ५०११ नो शरीरिणा परित्यक्तं (ति) २९७.१६ शरैः पूर्णायतोत्सृष्ट (द्रोण) १८६.५६ शर शराश्चापानि खङ्गाश्च (द्रोण) ४१.१७ शरीरमात्रमेवाद्य मया (आ) १६६.१० शरीरस्यापि मोक्षाय (आ) ११६.२८ शरारणा शरीरिणा हि मरणं शरीरे(वन) ३५.६ शरै प्रच्छाद्य निधनमनय(कर्ण)७३.३० शरासनधरांश्चैव गदा(शांति) १६६.४ शरीरमापदश्चापि (शांति) २६५.१६ शरीरस्याविरोधेन (वन) ३०१.२ शरीरे आयते व्याधिः (बाश्व) १२.२ शरैः प्राचिच्छेद तब (f) 8.. For P 3 Personal Day

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