Book Title: Jain Padarth Vigyan me Pudgal
Author(s): Mohanlal Banthia
Publisher: Jain Shwetambar Terapanthi Mahasabha
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परिणत, वित्रता परिणत, पुद्गल के चार भेद-स्कन्ध, देश, प्रदेश और परमाणु, पृ० ४५; पुद्गल के ६ भेद - सूक्ष्म सूक्ष्म, सूक्ष्म, सूक्ष्म बादर, चादर सूक्ष्म, वादर और वादरचादर, पृ० ४६, पुद्गल के २३ भेद, पृ० ४७; पुद्गल के ५३० भेद, पृ० ४७, जाति अपेक्षा से श्रनन्त भेद, पृ० ४८, भाव गुणाश से अनन्त भेद, पृ० ४६, पर्याय अपेक्षा से अनन्त भेद, पृ० ५०
४ - चतुर्थ अध्याय परमाणु पुद्गल
पृ० ५१-५८
कारण अणु और अनन्त अणु, पृ० ५२, परमाणु पुद्गल के गुण, पृ० ५४, पुद्गल परिभाषा की कसौटी पर, पू० ૫૬
५ - पंचम अध्याय विभिन्न अपेक्षाओ से परमाणु पुद्गल, पृ० ५६-५८ नाम अपेक्षा, पृ० ५६, द्रव्य अपेक्षा, पृ० ५६, क्षेत्र अपेक्षा, पु० ५६, काल-प्रपेक्षा, पृ० ५६, भाव-अपेक्षा, १० ५६, नित्यानित्य- अपेक्षा, पू० ५६, श्रवस्थित अपेक्षा, पृ० ६०, श्रस्ति अपेक्षा, पृ० ६०, रूप अपेक्षा, पृ० ६०, प्राकार अपेक्षा, पृ० ६०, परिणाम अपेक्षा, पू० ६१; अगुरु-लघु अपेक्षा, पृ० ६१, शाश्वताशाश्वत अपेक्षा, पृ० - ६२, चरमाचरम- अपेक्षा, पृ० ६२, जीव-प्रपेक्षा, पृ० ६२, तचित्त चित्त अपेक्षा, पृ० ६२, श्रात्मा-अपेक्षा, ६३, प्रदेश अपेक्षा, पृ० ६३ क्षेत्र प्रदेश- अपेक्षा, पृ० ६३, क्षेत्र

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