Book Title: Agam Suttani Satikam Part 23 Dashashrutskandh Aadi 3agams
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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१९८
महानिशीथ - छेदसूत्रम् -५/-/८१२
महामई दुवाल - संग-सुयधारी भवेज्जा से णं अपक्खवाएणं अप्पाउक्खे भव्व-सत्ते-सुयअतिसएणं विन्नाय एक्करसण्हं अंगाणं चोदसण्हं पुव्वाणं परमसार-नवणीय-नवनीय-भूयं सुपउणं सुपद्धरुज्जयं सिद्धिमग्गं दसवेयालियं नाम सुयक्खंधं निऊहेज्जा से भयवं किं पडुच्च, गोयमा मनगं पडुच्चा जहा कहं नाम एयस्स णं मनगस्स पारंपरिएणं थेवकालेणेव महंत घोर दुक्खागराओ चउगइ-संसारसागराओ निप्फेडो भवतु भवदुगुंछेवण न विणा सव्वन्नुवएसेणं से य सव्वनुवएसे अनोरपारे दुरवगाढे अनंत-गमपज्जवेहिं नो सक्का अप्पेणं कालेणं अवगाहिउं तहा णं गोयमा अइसए णं एवं चिंतेज्जा एवं से णं सेजंभवे जहा ।
मू. (८१३) अनंतपारं बहु जाणियव्वं अप्पो य कालो बहुले य विग्धे जं सारभूयं तं गिण्हयव्वं हंसो जहा खीरमिवंबु मीसं ।
मू. (८१४) तेणं इमस्स भव्व सत्तस्स मनगस्स तत्त-परित्राणं भवउ त्ति काऊणं जाव णं दसवेयालियं सुयक्खंधं निज्जूहेज्जा तं च वोच्छिन्नेणं तक्काल-दुवालसंगेणं गणिपिडगेणं जाव णं दूसमाए परियंते दुप्पसहे ताव णं सुत्तत्येणं वाएजा से य सयलागम-निस्संदं दसवेयालिय-सुयक्खंधं सुत्तओ अज्झीहीय गोयमा से णं दुप्पसहे अनगारे तओ तस्स णं दसवेयालिय- सुत्तस्सानु - गयत्थानुसारेणं तहा चेव पवत्तेज्जा नो णं सच्छंदयारी भवेज्जा तत्थ य दसवेयालिय- सुयक्खंधे तक्कालमिणमो दुवालसंगे सुयक्खंधे पइट्ठिए भवेजा एएणं अट्ठेणं एवं बुच्चइ जहा तहा वि णं गोयमा ते एवं गच्छ - ववत्थं नो विलंधिंसु ।
मू. (८१५) से भयवं जइ णं गणिणो वि अच्चंत विसुद्धा परिणामस्स वि केइ दुस्सीले सच्छंदत्ताए इवा गारवत्ताए इ वा जायाइमयत्ताए इ वा आणं अइक्कमेज्जा से णं किमाराहगे भवेज्जा गोयमा जे णं गुरु सम सत्तमित्त पक्खो गुरु-गुणेसुं ठिए सययं सुत्ताणुसारेणं चेव विसुद्धासए विहरेज्जा तस्साणमइक्कंतेहि नव-नउएहिं चउहिं सएहिं साहूणं जहा तहा चेव अनाराहगे भवेज्जा ।
मू. (८१६) से भयवं कयरे णं ते पंच सए एक्क विवज्जिए साहूणं जेहिं च णं तारिस गुणोववेयस्स महानुभागस्स गुरुणो आणं अइक्कमिउं नाराहियं गोयमाणं इमाए चैव उसभ- चउवीसिगाए अतीताए तेवीसइमाए चउवीसिगाए जाव णं परिनिव्वुडे चउवीसइमे अरहा ताव णं अइक्कतेनं केवइएणं काणं गुण-निप्पन्ने कम्मसेल-मुसुमूरणे महायसे महासत्ते महानुभागे सुगहिय-नामधे जे वइरे नामं गच्छाहिवई भूतस्स णं पंच-सयं गच्छं निग्गंधीहिं विणा निग्गंथीहिं समं दो सहस्से य असि ता गोयमा ताओ निग्गंधीओ अच्चंत परलोग भीरुयाओ सुविसुद्ध निम्मलंतकरणाओ खंताओ दंताओ मुत्ताओ जिइंदियाओ अच्चंत भणिरीओ निय-सरीरस्सा वि य छक्काय- वच्छलाओ जहोवइट्ठ - अच्चं घोर-वीर-तव-चरण- सोसिय-सरीराओ जहा णं तित्थयरेणं पन्नवियं तहा चेव अदीन-मनसाओ माया-मय- अहंकार - ममाकार रतिहास- खेड्डु-कंदप्प- नाहवाय-विप्पमुक्काओ तस्सायरियस्स सगासे सामन्नमनुचरंति ते यं साहुणो सव्वे वि गोयमा न तारिसे मनागा अहन्नया गोयमा ते साहुणो तं आयरियं भांति जहा जइ णं भयवं तुमं आणवेहिं ता णं अम्हेहिं तित्थरजत्तं करिय चंदप्पह- सामियं वंदिय धम्म चक्कं गेतूणमागच्छामो ताहे गोयमा अदीणमनसा अनुत्तावलगंभीर-महुरारू भारतीए भणियं तेनायरिएणं जहा इच्छायारेणं न कप्पइ तित्थजत्तं गंतुं सुविहियाणं ता जाव णं बोलेइ जत्तं ताव णं अहं तुम्हे चंदप्पहं वंदावेहामि अन्नं चजत्ताए गएहिं असंजमे
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