Book Title: Agam Suttani Satikam Part 23 Dashashrutskandh Aadi 3agams
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

View full book text
Previous | Next

Page 240
________________ अध्ययनं : ६, उद्देशक : मू. (१३३५) मू. (१३३६) दुक्खेहिं न निव्विन्नो सोक्खेहिं न गोयमा तिप्पे ॥ जीवेन जानि उ विसज्जियाणि जाई -सएसु देहानि । थेवेहिं तओ सयलं पि तिहुयणं होज्जा पडहत्थं ।। नह-दंत-मुद्ध-भमुहक्का केस - जीवेन विप्पमुक्केसु । तेसु वि हवेज कुल-सेल-मेरु- गिरि-सन्निभे कूडे ॥ मू. (१३३७) हिमवंत - मलय-मंदर दीवोदहि-धरणि-सरिस-रासीओ । अहिययरो आहारो जीवेनाहारिओ अनंतहुत्तो ।। मू. (१३३८) गुरु- दुक्ख-भरुक्कंतस्स अंसु-निवाएण जन जलं गलियं । तं अगड-तलाय - नई - समुद्द- माईसु न वि होज्जा ॥ आवीयं थण- छीरं सागर-सलिलाओ बहुयरं होज्जा । संसारम्मि अनंते अविला-जोनीए एक्काए । मू. (१३३९) मू. (१३४१) मू. (१३४२) मू. (१३४३) मू. (१३४०) सत्ताह - विवन्न- सुकुहिय-साण - जोनीए मज्झ-देसम्मि । किमियत्तण-केवलएण जाणि मुक्काणि देहानि ॥ तेसिं सत्तम- पुढवीए सिद्धि-खेत्तं च जाव उक्कुरुडं । चोद्दस-रज्जुं लोगं अनंत-भागेन वि भरिज्जा ।। पत्ते य काम भोगे कालं अनंतं इहं सउवभोगे । अव्वं चिय मन्त्रए जीवो तह वि य विसय सोक्खं ॥ to कच्छुल्ल कच्छु कंडुयमाणो दुहं मुणइ सोक्खं । मोहाउरा मनुस्सा तह काम दुहं सुहं बेंति । मू. (१३४४) जाणति अनुहवंति य जम्म-जरा-मरण-संभवे दुक्खे ॥ न य विसएसु विरज्ञ्जंति गोयमा दोग्गई-गमण-पत्थिए जीवे ॥ सव्व-गहाणं भवो महागहो सव्वदोस-पायड्डि । काम - गहो उ दुरप्पा तस्स वसं जे गया पानी ।। जाणति जहा भोग- इड्डि-संपया सव्वमेव धम्मफलं । तह विदढ - मूढ-हिय पावं काउण दोग्गइं जंति ॥ मू. (१३४५) मू. (१३४६) मू. (१३४७) मू. (१३४८) खणं जीव पित्ताणिल सेंभ - धाउ-खोभेहिं । उज्जमह मा विसीयह तरतम जोगो इमो दुसहो । पंचिदियथणं मानुसत्तणं आरियं जनं सुकुलं । साहु-समागम-सुणणं सद्दहणारोग्ग-पव्वज्जा ।। मू. (१३४९) सूल - विस-अहि-विसुइया पाणिय-सत्यग्गि-संभमहिं च । देहतर- संकमणं करेइ जीवो मुहुत्तेणं ॥ मू. (१३५०) जाव आउ सावसेसं जाव य थेवो वि अत्थि ववसाओ । ताव करे अप्प - हियं मा तप्पिहहा पुणो पच्छा ॥ मू. (१३५१) सुर-धनु-विज्जू-खण-दिट्ठ-नट्ठ-संझानुराग-सिमिण समं । For Private & Personal Use Only Jain Education International २३७ www.jainelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 238 239 240 241 242 243 244 245 246 247 248 249 250 251 252 253 254 255 256 257 258 259 260 261 262 263 264 265 266 267 268 269 270 271 272 273 274 275 276 277 278 279 280 281 282 283 284 285 286 287 288 289 290 291 292