Book Title: Agam 09 Ang 09 Anuttaropapatik Sutra Sthanakvasi
Author(s): Ghasilal Maharaj
Publisher: A B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti

View full book text
Previous | Next

Page 135
________________ अर्थवोधिनी टीका वर्ग ३ पुद्गलपरावर्तवर्णनम् पुद्गलानाम् आहारकवजितौदारिकादिवर्गणायोग्यानां चतुर्दशरज्वात्मकलोकवतिसमस्तपरमाणूनां परावतः सामस्त्येन स्पर्श संमिलनं पुद्गलपरावर्तः। स च यावता कालेन भवति स कालोऽपि पुद्गलपरावर्त इत्युच्यते । स चानन्तोत्सर्पिण्यवसर्पिणीपरिमाणः । स सप्तविधः ___ (१) औदारिकपुद्गलपरावर्तः, (२) वैक्रियपुद्गलपरावर्तः, (३) तैजसपुद्गलपरावतः, (४) कार्मणपुदगलपरावतः, (५) मनःपुद्गलपरावर्तः, (६) भाषापुद्गलपरावर्त्तः, (७) श्वासोच्छवासपुद्गलपरावतः, । उक्तञ्च ___........सत्तविहे पोग्गलपरियट्टे पण्णत्ते तं जहा- (१) ओरालियपोग्गलपरियट्टे, (२) वेउव्वियपोग्गलपरियट्टे, (३) तेयापोग्गलपरियट्टे (४) कम्मापोग्गलपरियट्टे, (५) मणपोग्गलपरिय), (६) वइपोग्गलपरियट्टे, (७) आणापाणुपोग्गलपरियट्टे । ” ( भगवती० श० १२ उ० ४ ) आहारक शरीर को छोडकर औदारिक आदि शरीर की वर्गणाओं के योग्य चौदह राजुलोकवर्ती समस्त परमाणुओंका समस्त रूपसे सम्मिलन ही पुद्गलपरावर्त है । वह जितने कालसे होता है वह काल भी पुद्गलपरावर्त कहलाता है, इसका परिमाण (कालमान) अनन्त उत्सर्पिणियां और अवसर्पिणियां हैं। यह पुद्गलपरावर्त सात प्रकार का है : (१) औदारिक पुद्गलपरावर्त, (२) वैक्रिय पुद्गलपरावर्त, (३) तैजस पुद्गलपरावर्त, (४) कार्मण पुद्गलपरावर्त, (५) मनपुद्गलपरावर्त, (६) भाषा पुद्गलपरावर्त, (७) श्वासोच्छूवास पुद्गलपरावर्त । (भगवती० शतक १२ उ ४) ભગવાન કહે છે – આહારકને છેડીને ઔદારિક આદિ શરીરની વર્ગણાઓને ગ્ય ચૌદ રાજુલકવતી સમસ્ત પરમાણુઓના સમસ્તરૂપથી સમ્મિલનજ પુદ્દગલપરાવર્ત છે, તે જેટલા કાલમાં થાય છે, તે કાળ પણ પુદગલ-પરાવર્ત કહેવાય છે, તેનું પરિમાણ (કાળમાન) અનન્ત ઉત્સપિણિઓ અને અવસર્પિણિઓ છે. या पुस-रात सात प्रा२र्नु छ:- (१) मोहा२ि४-पास-परावत, (२) वैठिय-पास-परावतः, (3) तेस-दादा-परावतः, (४) सम- स-परावत, (५) भन-५६४-पराक्त, (6) लाषा- पुस-परापत, (७) श्वासोश्वास-पासપરાવર્ત, આ સાત પુદ્ગલપસવને ઉલ્લેખ ભગવતી શ ૧૨ ઉ. ૪ માં પણ છે. શ્રી અનુત્તરોપપાતિક સૂત્ર

Loading...

Page Navigation
1 ... 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144 145 146 147 148 149 150 151 152 153 154 155 156 157 158 159 160 161 162 163 164 165 166 167 168 169 170 171 172 173 174 175 176 177 178 179 180 181 182 183 184 185 186 187 188 189 190 191 192 193 194 195 196 197 198 199 200 201 202 203 204 205 206 207 208 209 210 211 212 213 214 215 216 217 218