Book Title: Agam 04 Ang 04 Samvayanga Sutram Tika
Author(s): Abhaydevsuri, Jambuvijay
Publisher: Mahavir Jain Vidyalay
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४२
३४
७४
सिद्धी
१५७
समवायाङ्गसूत्रान्तर्गतविशिष्टशब्दसूचिः । विशिष्टशब्दाः सूत्राङ्काः | विशिष्टशब्दाः सूत्राङ्काः | विशिष्टशब्दाः सूत्राङ्काः सिद्धसेणियापरकम्म १४७ सीआ-सीओआओ १०८ | सीसावेढेण ३० (१) सिद्धाइगुणा ३१ (१) सीओसणिजं ९ (१) सीहं
१७ (३) सिद्धालए १२(१) सीतपरीसह २२ (१) सीहगिरी
१५७ सिद्धावत्तं
१४७ | सीतफासपरिणाम २२ (१) | सीहरह
१५७ सिद्धिगत
सीतल ३४, ७५, ८३ | सीहवियं १७ (३) सिद्धिगतिणामधेयं १ (२) सीतवेदणं
| सीहसेण
१५७ सिद्धिवजा
१५४ | सीता
१४ (१), १५३ | सीहासणं सिद्धिपह १४७ सीतोता
सीहोकतं १७ (३) सिद्धिसुगतिघरुत्तम सीतोदयवियडवग्धारिय- | सुई
३२ (१) १२ (१) पाणि २१ (१) | सुंदर सिरि १५७, १५८ | सीतोदा
१४ (१) | सुंदरबाहू ___ १५७ सिरिउत्त १५८ सीतोसिणवेयणं १५३ | सुसमा
१९ (१) सिरिकंत १४ (३), १५७ | सीमंकर
१५८ | सुकडदुक्कडाणं सिरिचंद १५८ सीमंतए
४५ सुकालं
१८ (३) सिरिदामगंड २१ (३) सीमंधर
१५८ | सुकिडिं
४ (४) सिरिधर ८ (१) सीमाविक्खंभ
| सुकुलपच्चायाती १४१, १४२, सिरिभूती १५८ सीयल
१४४, १४६ सिरिमहिअं १४ (३) सीया
१५८ | सुक्क ४ (१), १७ (३), सिरिवच्छं २१ (३) सीयाओ १४७, १५७
१९ (१) सिरिवच्छसुलंछण १५८ |सीलवयगुणवेरमणपच्चक्खा- सुक्कपक्ख १५ (१), ६२ सिरिसे
१५७ णपोसहोववासा १४२ सुक्कलेसा ६ (१), १५३ सिरिसोम
१५८ सीलव्वयवेरमणगुणपच्चक्खा- | सुक्किलवण्णपरिणाम २२ (१) सिरिसोमणसं १४ (३) णपोसहोववासपडिवज्ज- सुगंधवरगंधगंधिया १५० सिरी ३० (१) णतातो
१४२ | सुग्गीव १५७, १५८ सिलोग
७२, १३६ सील-संजम-णियम-गुण- | सुघोस ६ (४),१० (४),१५७ सिलोगाणुवाती ९ (१)। तवोवहाणेसु १४६ | सुचंदं
१५८ सिव १ (२), १५७, १५८ सीसग
१४६ | सुजसा
१५७ सिवसेण
सीसपहेलिय ८४ | सुज
९ (४) सिहरतल ११ (२), ५०, सीसम्मि ३० (१) सुज्जकंतं ९०, ११२ सीसहितत्थाय ।
१४० सुज्जप्पभं सिहरी ७(१), २४(१), १०० सीसा
१४७ | सुज्जावत्तं
९ (४)
६७
९ (४)
९ (४)
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