Book Title: Tulsi Prajna 2004 01
Author(s): Shanta Jain, Jagatram Bhattacharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 24
________________ ६. तत्रैव अ. ५.१४ ७. अमरकोश २.६.३.२२-४१ ८. तत्रैव २.६.३.२२-२४ ९. तत्रैव २.६.३.२५-३३ १०. मेघदूत पर मल्लिनाथ की टीका ११. सुभाषितावली १२. उज्ज्वल नीलमणि १३. संस्कृत-हिन्दी धातु कोष, पृ. १३६ १४. अमरकोश २.६.२३ १५. शब्द कल्पद्रुम, भाग-५, पृष्ठ ४५२ १६. चरकसूत्र अ. ५ १७. ज्ञाताधर्मकथासूत्र ९-११ अंगसुत्ताणि भाग-३, पृष्ठ २०७ १८. तत्रैव १.१३.२४-२५ अंसु-३, पृष्ठ २४१-२४२ १९. उपासकदशाध्ययनसूत्र १.२९ अंसु-३, पृष्ठ ४०२ २०. भगवतीसूत्र ७.१७६, १८५, १९६, ९.१६२, ११.१३८, १५१, अंसु-२ २१. ज्ञाताधर्मकथासूत्र १.१.२४, अंसु-३, पृष्ठ १०-११ २२. तत्रैव १.१६.१४०, अंसु (अंगसुत्ताणि)-३, पृष्ठ २९९ २३. विपाकसूत्र ९.५०, अंसु-३, पृष्ठ ७९६ २४. ज्ञाता. १.१.२४ २५. तत्रैव १.१६.१४० २६. आचारचूला १५.१४, अंसु-१, पृष्ठ २३४ २७. ज्ञाता. १.१.८२ २८. ज्ञाताधर्मकथासूत्र १.१६.३६ २९. चरकसूत्र अ. ५.८५-८९ ३०. ज्ञाताधर्मकथासूत्र १.१.२४, अंसु-३, पृष्ठ १० ३१. उपासकदशा १.२९ अंसु-३, पृष्ठ ४०१-४०२ ३२. तत्रैव १.२९.४ ३३. तत्रैव १.२९.५ ३४. तत्रैव १.२९.८ ३५. संग्रहसूत्र अ. ३.६९ ३६. स्थानांगसूत्र ३.८७ ३७. ज्ञाताधर्मकथासूत्र १.१६.७८, अंसु-३, पृष्ठ २८७ ३८. उपासकदशासूत्र १.२९, अंसु-३, पृष्ठ ४०१ ३९. विपाकसूत्र ९.५०, अंसु-३, पृष्ठ ७९५ तुलसी प्रज्ञा जनवरी-मार्च, 2004 - - 19 Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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