Book Title: Samacharishatakama
Author(s): Samaysundar, 
Publisher: Jindattsuri Gyanbhandar

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Page 345
________________ दुग्गइ आवस्सियं करिअ साहुव उवउत्तो निजीवथंडिले गंतुं अणुजाणह-जस्सावग्गहोत्ति भणिऊण दिसिपवणगामसूरियाए समयविहिणा उच्चारपासवणे वोसिरिअ फासुअजलेण आयमिय पोसहसालाए आगंतूण निसिहीआइ पुर्व पविसिअ इरियावहियं पडिक्कमिअ खमासमणपुर भणति, इच्छाकारेण संदिसह भगवन् गमणागमणं आलोयह इच्छं आवस्सिअं| करिअ अवरदक्षिणप्पमुहदिसाए गच्छिअ दिसालोअं करिअ संडासए थंडिलं च पडिलेहिअ उच्चारपासवणं वोसिरिअ निसीहिलं करिअ पोसहसालं पविट्ठा आवंतजंतेहिं जं खंडिअंजं विराहि तस्स मिच्छामि दुक्कडं", तओ सज्झायं ताव करेइ जाव पच्छिमपहरो जाए अ, तम्मि खमासमणपुवं पडिलेहणं करेमि, पुणो पोसहसालं पमजेमि त्ति पुवं च अंग पडिलेहणं काऊं पोसहसालं दंडपुच्छणेण पमजिअ कजेअ उद्धरिअ परिदुविअ इरियं पडिक्कमिअ ठवणायरिअं पडिलेहिअ ठवेइ । तओ गुरुसमीवे ठवणायरीय समीवे वा खमासमणदुगेण मुहपोतिं पडिलेहिअ पढमखमासमणे इच्छाकारेण संदिसह भगवन् सज्झायं संदिसावेमि बीअ, खमासमणे सज्झायं करेमि त्ति भणिअ सज्झायं वंदणयं दाऊण गुरुसक्खियं पञ्चक्खाई, तओ खमासमणदुगेण उवहि थंडिलपडिलेहण संदिसावीय उवहि पडिलेहणं करेमि खमासमणदुगेण बइसणं संदिसावेमि बइसणं ठाएमि त्ति भणिय वत्थकंबलाई पडिलेहेइ । इत्थ जो अभत्तट्ठी स सबोवहि पडिलेहाणंतरं कडिपट्टयं पडिलेहेइ, जो पुण भत्तट्ठी सो कडिपट्टयं पडिलेहिअ, उवहिं पडिलेहि इति विसेसो । तओ सज्झायं ताव करेइ जाव | कालवेला, जायाए अतीए उच्चारमासवणं थंडिले चउवीसं पडिलेहिअ, जा तम्मि दिणे चउद्दसीए पक्खियं चाउम्मासं *08%AISISSAR सामा०२९ IES Jain Education Inter www.jainelibrary.org For P & Personal Use Only 237

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