Book Title: Mahavir Charitram
Author(s): Gunchandra
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund

View full book text
Previous | Next

Page 636
________________ महावीरच० श्रीगुणचंद 18 ताव तेसिं संकहा, संपइ कालोचियं कहसु, तओ सुचिरं कइयवेण सिरं धुणिऊण भणियं तेण-सेटि! जइ अब-15 तुर्याणुव्रते स्समेयस्स दोसस्स पडिविहाणं काउमिच्छसि ता निविवरविसिट्ठसुसिलिट्ठकपडणाए मंजूसाए अभितरंमि एवं सुरेन्द्रदत्त८प्रस्ताव नियधुयं पक्खिविऊण सयलभूसणसणाहं सुमुहुत्तंमि दिसिदेवयापूयापुरस्सरं जमुणानई जलं मि पवाहिज्जासि, जेग | कथायां शुभंकरासेसगेहजणस्स जियरक्खा भवइत्ति, तओ गुरुवयणं न अन्नहा जायइत्ति कलिऊण भयभीएण अविमंसिऊण ख्यानं. दातदभिप्पायं कालक्खेवपरिहीणं जहुत्तसमग्गसामग्गिपुरस्सरं नियधूयमभंतरे पक्खिवित्ता सुहंकरमुणिणो समक्खं दुस्सहवचविओगसोगसंभाररुद्धकंठेण अणवरयगलंतनयणवाहप्पवाहपक्खालियगंडयलेण पवाहिया सेहिणा जमुगाजले मंजुसा, सा य तरमाणा अणुसोएण गंतुमारद्धा, तेणावि सुहकोण आगंदसंदोहमुबहतेग निययासमंमि गंतुण भणिया नियसिस्सा-अरे तुम्हे सिग्घवेगेण गंतूण कोसमेतमि नइहेढभागंमि ठायह, तरमाणिं च मंजूसं इंतिं जया पासह तया तं गिहिऊण अणुग्घाडियदुवारं मम पणामे जहत्ति सोचा गया ते, ठिया य जहुत्तठागंमि, |सा य मंजूसा कल्लोलपणोल्लिजमाणी जाव गया अद्धकोसमेगं ताव नइजले मजणलीलं कुगमाणेण एगेण रायपुत्ते ग दूराओ चिय पलोइया, भणिया य नियपुरिसा-अरे धावह सिग्यवेगेण, गिण्हह एवं वारिपूरेण हीरमाणं पयत्थंति, 3॥३०॥ पविट्ठा य वेगेण पुरिसा, गहिया अणेहिं मंजूसा, समप्पिया य रायपुत्तस्स, तेणावि उग्घाडिया सको उहलेग, पायालकन्नगव सवालंकारमणहरसरीरा नीहरिया तत्तो सा जुवई, गहिया य सहरिसेण रायपुत्तेण, चिंतियं चाणेग-अहो! CROCAROCKSSSCRMONECHECE lain Educat i onal For Private & Personel Use Only tohinelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 634 635 636 637 638 639 640 641 642 643 644 645 646 647 648 649 650 651 652 653 654 655 656 657 658 659 660 661 662 663 664 665 666 667 668 669 670 671 672 673 674 675 676 677 678 679 680 681 682 683 684 685 686 687 688 689 690 691 692 693 694 695 696 697 698 699 700 701 702 703 704