Book Title: Jindutta Charit
Author(s): Rajsinh Kavivar, Mataprasad Gupta, Kasturchand Kasliwal
Publisher: Gendilal Shah Jaipur
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मालिण - मालिन - २१३, ३६५, । मिले =
-१५०, मालिरिंग - -२०५, २०६, | मीच = मौत - २१४, .....आदि, मालिशिस्यों = मालन से - २१५, | मीच = मृत्यु - ४२, ५१.६, मालिन%3D
- २०६, मीठु = मीठ - ४२४, माली = एक जाति – ४६, मी!गु = मौन (मछली) - ३९. मारहती - लीला पूर्वक - १०१, मुकउ = मरा हुआ – २११. मास = महीने -- २७, ५६, यादि, मुबके = मुक्त - १ माह = में - ३१२,
मुख = - ४३६, माहि = मे - ३४०, ३८०, 'प्रादि. मुखी : मुखवाली - १५७, माहिला = मारमा होमा ......', मुठि = मुट्ठी – ६८, ३१, माही - - २२८, मुखाई =
-४११, मांगउ = मांगता - ३६३, मुणज = जानो - २६६, ५५२, मांगियर = ............. - ४६२, मुणस् = मनुष्य - २६५, मांभि = मध्यभाग -- १५३, मुशासाइ = मनुष्यता - २६४, मांटे = - ४१२, मुण्हु =
- ५१७, ५४८, म्हारौ = हमारा - ४०१,
मुखाइ = मरने पर - २५३. मिद्धती = मित्त्यात्व – ५४६, मुगि = जानना -- ६४, ५३०, मिटावहि = - ४६८, मुरिगउन = नहीं जानता - १६४, मिठिया = मधुर – २२१,
मृरिणवर :- मुनिघर - ५५, ५७, प्रादि, मिमि = - १५६, मुगिसरु =
-४४५, मिय = मित - ४०२।।
मुणिमुबह = मृनिमुव्रत - ७, मियरणय लि = मृग नयनी - ६७. मुरिण हं = मुनिवर – ६२, मिल - मिलना - ३२५, ३५१, मुग्गिद = -५२०, ५२३, मिलावहि = मिलाना - ४०७. मुणीसह = मुनीश्वर - ५३१, ५३७, मिलब - मिलकर - ३६२, मुक्तादेवी =
-२७७, मिलहि । .......... - १८१, मुक्ताल = मुक्ताफल - १३५, ४४२, मिलि = मिलकर - १२२, आदि, मुक्ति = मोक्ष – ५१, ...... आदि, मिलिउ = - १२३, मुदिगर = मुद्गर – १६१, मिलिए =
- १८७,
मुद्द = मोह - २२१, मिलिय = मिल गये - ४६२, मुनि = - ५६, ५१४, मिलियउ - -४८८, मुनिः =
- ४६४, मिली = - २८६, २८६, । मुनिनाह -- मुनिनाथ -- २८२,

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