Book Title: Jaipur aur Nagpur ke Jain Granth Bhandar
Author(s): Premchand Jain
Publisher: University of Rajasthan

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Page 31
________________ Badhi Chand Ji Mandir Granth Bhandar [ 17. श्री भूषणः स्वस्य गुरोः सुशिष्यः सूरिः स्वयं शास्त्रविदां मतश्च । तदा......"च्छी शुभचन्द्र देवः चक्रे सुपंजी जिनकाव्यवाण्याः ॥८॥ वरिण श्रीपालनामा मतिमतमहितो मार्गस! निसर्गादग्रस्त्रविध विद्या विधिविकचसरो जात भास्वद्विवस्वान । सार्थ नथार्थवेत्ता विशदमिदमरं पुस्तकं प्राक् सुपार्वकाव्यस्य वै सुपंज्याः लिखित ललितवाक् वाग्मिनां चोपजीव्यः ।।६।। पंजिकेयं चिरं चित्ते स्थयात्सद्विदुषां स्थिरम् । कृता श्री शुभचन्द्ररण श्री भूषणसमाग्रहात् ॥१०॥ श्री पार्श्व पूज्यपादो गणिगणविनुतः श्री प्रभाचन्द्रदेवः सिद्धः श्री वर्धमानो वरविजय यशाः ज्ञानभूषोऽकलंकः । दिव्य श्री भूषणो अवरविधि विदुषां शास्वत श्री शुभेन्दुः श्रीपालः पातु पापात्प्रमितिपरिणतिर्वादिराजश्च युष्मान् ॥११॥ इति श्री पार्श्वनाथ-काव्य-पंजिका समाप्ता। " Size No. 3 RAM CHARITRA Author --BRAHM JINDAS -12"x6" Extent -460 Folios, 10 lines per page, 40 letters per line. Description - Country paper rough and greyish; Devanagari characters in clear and beautiful hand-writing; borders ruled in three lines and edges in one line; red chalk and yellow pigment used; Manuscript contains only the text in Sanskrit verses; it is a complete work in good condition. Age -Fairly old. Subject -CHARITA ...... Begins .-सुरेन्द्रमुकुटाश्लिष्ट पादपद्मांशु केशरम् । . प्रणमामि महावीरं लोक त्रितयमंगलम् ॥१॥ 'सिद्ध संपूर्ण भव्यार्थ सिद्दे कारणमुत्तमम् । प्रशस्तदर्शन ज्ञान-चारित्र प्रतिपादनम् ॥२॥ मुनि सुव्रततीर्थेशं सुव्रतं वरचेष्टितम् । .. प्रणमामि सदा भक्त्या भव्य मंगलदायकम् ॥३॥ Ends --श्रीमद्राम चरित्रमुत्तममिदं नाना कथापूरितं . पापाध्वान्त विनाशनकतरणि कारूण्यवल्लीवनं ।

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