Book Title: Angpavittha  Suttani
Author(s): Ratanlal Doshi, Parasmal Chandaliya
Publisher: Akhil Bharatiya Sadhumargi Jain Sanskruti Rakshak Sangh

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Page 1430
________________ विवागसुयं सु. 1 अ. 2 1417 गामे गयरे उच्चणीयमज्झिमकुलाइं अडमाणे अहापज्जतं समदाणं गिण्हइ 2 ता वाणियगामे गयरे मझमझेणं जाव पडिसेइ 2 ता समणं भगवं महावीरं वंदइ णमंसइ वं० 2 ता एवं बयासी-एवं खल अहं भंते ! तुहि अन्मणण्णाए समाणे वाणियगामं जाव तहेव णिवेएइ / से गं भंते ! पुरिसे पुत्वभवे के आसी जाव पच्चणभवमाणे विहरइ ? एवं खलु गोयमा! तेणं कालेणं तेणं समएणं इहेव जंबूद्दीवे 2 भारहे वासे हस्थिणाउरे णामं णयरे होत्था रिद्धः / तत्थ जे हथिणाउरे गयरे सुणंदे णामं राया होत्था महया०, तत्थ गं हस्थिणाउरे गयरे बहुमज्झदेसमाए एत्थ णं महं एगे गोमंडवे होत्था अणेगखंभसयसम्णिविठे पासाईए 4 / तत्थ गं बहवे णयरगोरूवाणं सणाहा य अगाहा य जगरगाविओ य णगरवसमा य णगरबलीवहा य णगरपड्डयाओ य पउरतणपाणिया णिमया णिरुवसग्गा सुहं सुहेणं परिवति / तत्थ गं हस्थिणाउरे गयरे भीमे गाम कूडग्गाहे होत्था अहम्मिए जाव दुप्पडियाणवे / तस्स गं भीमस्स कूडग्गाहस्स उप्पला णामं भारिया होत्था अहीण / तए णं सा उप्पला कूडग्गाहिणी अण्णया कयाइ आवण्णसत्ता जाया यावि होत्था / तए गं तीसे उप्पलाए कूडग्गाहिणीए तिण्हं मासाणं बहुपडिपुग्णाणं अयमेयारवे दोहले पाउन्भूए-धण्णाओ गं ताओ अम्मयाओ 4 जाव सुलद्धे जम्मजीवियफले जाओ गं बहूणं गगरगोरुवाणं सणाहाण य जाव वस.माण य ऊहेहि य थणेहि य वसणेहि य छप्पाहि य ककुहेहि य वहेहि य कण्णेहि य अच्छीहि य णासाहि य जिम्माहि य ओछेहि य कंबलेहि य सोल्लेहि य तलिएहि य मज्जिएहि य परिसुक्केहि य लावणेहि य सुरं च महं च मेरगं च जाइं च सीधुं च पसण्णं च आसाए. माणीओ विसाएमाणीओ परिभाएमाणीओ परिमजेमाणीओ दोहलं विणेति, तं जइ गं अहमवि बहूणं णगर जाव विणिज्जामिसिकट्ट तंसि दोहलंसि अविणिज्जमाणंसि सुक्खा मुक्खा जिम्मंसा ओलुग्गा ओलुग्गसरीरा गित्तेया वीणविमणवयणा पंडुल्लइयमुहा ओमंथियणयणवयणकमला जहोइयं पुप्फवस्थगं. धमल्लालंकाराहारं अपरिभुजमाणी करयलमलिय-व्व कमलमाला ओहय जाव झियाइ / इमं च गं भीमे कूडग्गाहे जेणेव उप्पला कूडग्गाहिणी तेणेव . उवागच्छइ 2 ता ओहय जाव पासइ 2 ता एवं वयासी-किं गं तुमं देवाण.

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