Book Title: Mandira Sati Charitra
Author(s): Amolakrushi Maharaj
Publisher: Lala Shivkarandasji Arjundas

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Page 4
________________ ॥ नमः ॥ ॥ श्री परमात्मायः ॥ ___ अथ शील महात्म ॥ श्री मन्दिरा सती चरित्र प्रारंभ ॥ ॥ दुहा ॥ सच्चिदानंद जग विभू । अव्यय अव्या वाध ॥ त्रिकरण शुद्ध वन्द्र नमु । वक्षो विमल बुद्ध साध ॥ १॥ तीर्थंकर सिद्ध सुरीवर । वह सूत्री मुनि राज ॥ लिए पांचो पद में नमू । देवो रचन सुसाज ॥ २ ॥ गोयम गण धर लब्ध घर । महू साधू सिरदार ॥ प्रणमू श्री गुरु. देवने । स्याद् वाद मत दातार ॥ ३ ॥ अहं गिरा एक प्रगटी । सारदा दाता सार ।। तास प्रशाद साहस करूं । वरणू शील अधिकार ॥ ४ ॥ गुणो बृद्ध सह संत को । आश्रय धर आधार ॥ मन्दिरा सती सत्यनी कथा । विस्तार संगित मझार॥ ५ ॥सर्व वृत शिर सेहरो । सर्व धर्म मंडाण । सर्व गुणो मा मूल गुण ॥

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