Book Title: Dasveyaliya Uttarjzhayanaim Avassay suttam
Author(s): Shayyambhavsuri, Pratyekbuddha, Ganadhar, Punyavijay, Amrutlal Bhojak
Publisher: Mahavir Jain Vidyalay
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५७०
पंचमं परिसिटुं सहो सुत्तंकाइ । सहो
सुत्तंकाइ पाणिपात-पाणिपात्र पृ० १०९ टि०७
१५५३, १५६४, १५७३, १५८३, पाणिय = पानीय
३१८,३८६
१५९२, १६०२, १६११, १६२६, पाणिवह-प्राणिवध
१६३५, १६४२, १६५१, १६७० पात= पाद
पृ० १७० टि० २ -पावइ १२५८, १२७१, १२८४, १२९७, पात्र पृ० १०९ टि०७
.... १३१०, १३२३ पादुकर
पृ० २२६ टि०४ -पावसु . पृ. २०३ टि० १८ * पादूकर
-पावसू .. .
८१२ - पादूकरे = प्रादुष्करोमि पृ० १७२ टि० २७ -पावेसू
पृ० २०३ टि. १८ पाय%Dपात्र-भाजन
१६८,५३८ पाव ३९८-९९,४६१,६६०,७५०,७८७, ,, पाद १९, २८८, ३८५, ३९२,५३८, ... ९८०,१०७८,१०८१,१२१६, १२३९
..५४३, ५५८, ६५४, ७१० पावकम्म ११८, १७१, ६५८, ६६२, पायकंबल =पादकम्बल-पादपुञ्छन ५३६
. १११८, ११३४, ११८२, १२१६ पायच्छित्त १११४, १२०६-७ पावकारि
११९,५७५ पायच्छित्तकरण ११०२, १११८ पावकिच्च
पृ० ११० टि० २ पायडलिंग
पृ० २५२ टि. ९ पावग-पापक-पाप १२, ७३, १६९, २१७, पायत्ताणीय
३७३, ४३०, ७७२, ११७७ पायव
पावग=पावक
४३१, ९७३ पायं = प्रातर्
पावदिहि
३८, ३९, ७२ ,,प्रायस् १२४४ पावपरिक्खेवि
३३५, ३३९ * पार
पावय-पापक-पाप -पारिता .. .. १०४५
१०८ पार ३२४, ९०६-७, १५१९ पावयण
७६५ पारग ५७२, ८३८, ९५९, ९८८ पावसमण .
५३२ तः ५४८ पारण..
- ९५७ पावसमणिज पृ० १६८ ५० १६ पारणय
पावसुय=पापश्रुत
१२३२ पारय%पारग
८४२, ८४४ पावासवनिरोह कर्माश्रवनिरोध ११५७ पारिय १०३५, १०३७, १०४२-४३, पाविय-प्राप्त
१०४६ ,, = पापिक
४२५, ६६२ पारेवय
पाविया पापिका
२१५ *पाल -
पास-पार्श्वजिन ८३७, ८४८, ८५९, ८६५ - पालइत्ता. ४४१, ११०१, ११७४ ,, = पार्श्व-समीप ४८८, ५५५, -पालिया
७३३, १०५२ -पालियाणं
,, पाश .. १२३, १६३, ६६८, पालि=पालि-भवस्थिति
८७६ तः ८७९ पालिय .. ७६४, ७६७ * पास *पाव-प्र+आप
- पास ११८, पृ० १०८ टि० ४, पृ० १.१५ - पप्प १४६१, १४६४, १५३१, १५३९,
टि.१
,
पावक
६६२
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