Book Title: Agamsaddakoso Part 3
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agamdip Prakashan

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Page 457
________________ ૪૫૬ आगमसद्दकोसो संथा. ३३; मतीय [मतिक] दृषिसाधन विशेष पण्हा. ३४; मत्त [अमत्र]वास, पात्र आया. ३६७,३९६; सूय. ६५७; ठा. १४६,८९६; भग. ९२,११३: जीवा. ३४१, सूर. १९६; निर. १५,१७; दसा. १०१; दस. ५०३; उत्त. १३८,८०६; मत्त (मत्त] सन्मत्त, मभिमानी आया. ३४९; सम. ३२७: नाया. १८,४५, उवा. २३,५४; पण्हा. १५,१९ उव. १,३०; राय. २९,४३; जीवा. १०५,१६९; जंबू. ३२; दसा. १०१, मत्तंग [मताङ्ग]sseuवृक्ष विशेष जंबू. ३३; - मत्तंगय [मताङ्गक]मो ७५२ सम. १६: मत्तग [अमत्रक] मानविशेष आया. ४५४; सूय. ६६४, मत्तग [मात्रक मोठं पात्र ओह. १०१०,१०१४; मत्तगय [मत्तगज]6न्मत्त थी भग. ४६५; तंदु. १४३: मत्तगयविलंबिय [मत्तगजविलम्बित मेहेताs / નાટ્ય વિશેષ राय. २४; मत्तगयविलसिय [मत्तगजविलसितावताs નાટ્ય વિશેષ राय. २४; मत्तजला [मत्तजला संतनही ठा. १८१,२११; जंबू. १७४: मत्तय [मात्रक भोटें पात्र ओह. १०१३,१०६७.१०७३,१०७४: मत्तय [अमत्रक] मानविशेष आया. ४८९,४९३; निसी. ८१८; मत्तहयविलंबिय [मत्तहयविलम्बित मे वताs નાટ્ય વિશે, राय. २४ मत्तहयविलसित [मतहयविलसित वितus નાટ્ય વિશેષ राय. २४; मत्ता [मात्रा] द्रव्यनुं परिभाए।, स्वही वगैरे માત્રા, અર્થમર્યાદા आया. ८२,१३३: मत्ता [मत्वा] मानाने सूय. १४२: उत्त. ११५; मत्तियावई मृतिकावती नगरी पन्न. १७० मत्थग [मस्तक भस्त, माधु सूय. ६४१, सम. ६९ः भग. ११६,१५६,४६३,५०६,५३५; नाया. १२,६४,८५,११२,१४७; उवा. ११.४५; अंत. १३,२० अनुत्त. १,१०: विवा. ९,२५, उव. ११,२८; राय. १०,४४; जीवा. १७९,१८० दसा. ५८; मत्थगसूल [मस्तकशूल] माथानी पी। जीवा. १८५; जंबू. ३७ मत्थय [मस्तक] भस्त, भा) चउ. ३०: भत्त. ४५; वव. ३३: __दसा. २८.९५: नंदी. ६२: मत्थयच्छिड्ड [मस्तकछिद्र] माथा- छिद्र नाया. ८५.९३: मत्थयत्थ [मस्तकस्थ] भाषामा २३ दस. ७१: मत्थयसूल [मस्तकशूल भाथानी पी। भग. १९५: तंदु. १०२: Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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