Book Title: Vinit Kosh
Author(s): Gopaldas Jivabhai Patel
Publisher: Gujarat Vidyapith Ahmedabad

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Page 662
________________ अभिनिष्यन्द अभिनिष्यन्द पुं० टपकवुं ते; झरवुं ते अभिनीति स्त्री० चेष्टा; हावभाव ( २ ) मैत्री; स्नेह अभिनुन वि० व्यथित; क्षुब्ध अभिनेय वि० भजववा लायक एवं अभिपत्ति स्त्री० पासे जनुं ते (२) समाप्ति ( ३ ) रक्षण ( ४ ) उपपत्ति; समर्थन अभिपद्म वि० अति सुंदर अभिपरिप्लुत वि० डूब गयेलं; परिपूर्ण; व्याप्त ( २ ) आक्रमण पामेलुं; - थी व्याकुळ बनेलुं [ नाश अभिपात पुं० संचार ; गति ( २ ) मृत्यु ; अभिपांडु वि० करमायेलु; निस्तेज अभिपूज् १० प० पूजा करवी ( २ ) संमानव; मान्य राखबुं अभिपू ३, ९ प० पूरवुं; भरी काढवु अभिप्रणी १प० मंत्रो वडे पवित्र कर अभिप्रवृत् १ आ० नी पासे जनुं के पहोंच ( २ ) -मां पडवुं; -ने मळवु अभिप्रवृत्त वि० -मां प्रवृत्त थयेलं; मंडेलु; मचेलु अभिप्लु ४ आ० - नी तरफ कूदवुं (२) ऊभराववुं; तरबोळ करवुं डुबाडवु अभिबल न० युक्तिथी तपास के परीक्षा करवी ते (काव्य ० ) अभिभत्सित वि० तिरस्कृत अभिभा २ प ० चळकवु; प्रकाशवं अभिभाषिन् वि० - नी साथे वात करतुं ने संबोधतुं अभिभू पुं० अहंकार अभिभूष १० उ० शोभा अर्पवी अभिमनस् वि० इच्छावाळु आतुर अभिमनायते आ० ( खुश थवं प्रसन्न थबुं; उत्सुक थवुं ) , 1 अभिमन्यु पुं० जुओ पृ० ५९७ अभिमर्शक, अभिर्माशिन्, अभिमर्षक, अभिमषन् वि० स्पर्श करतुं ( २ ) हुमलो Jain Education International ६४८ अभिशंकित करतुं ; बळात्कार करतु; संभोग करतु अभिमान न० प्रमाण अभिमुखता स्त्री० हाजरी; सांनिध्य (२) अनुकूळ होवापणुं अभिमुखयति प० ( खुश करवुं; प्रसन्न करवुं; वश करवुं ) अभिरक्ष १ प० रक्षण करवुं मदद करवी ( २ ) शासन करवुं अभिरक्षा स्त्री० बधी बाजुएथी रक्षण अभिराष् - प्रेरक० प्रसन्न करवु अभिराधन न० मनाववुं ते; खुश करवुं ते अभिरुचित पुं० प्रेमीजन [ करेलुं अभिलक्षित वि० चिह्नोवाळु ( २ ) पसंद अभिलक्ष्य वि० लक्षमां लेवा लायक (२) ताकवानुं होय एवं (३) चिह्नथी अंकित करवा लायक अभिलंघ् १,१० प० ओळंगी जवुं; कूदी जवं (२) उपर धसी जबुं ( ३ ) उल्लंघन करवुं अभिलाव पुं० लणणी; कापणी अभिलाषक, अभिलाषिन्, अभिलाषुक वि० उत्कट अभिलाषावाळं अभिली ४ आ० - मां प्रवेशबुं -मां छुपाaj अभिलीन वि० वळगेलुं (२) आलिंगतुं अभिवक्तृ वि० तोछडाईपी बोलनारं अभिविक्रम वि० पराक्रमी; शूरवीर अभिवीज् - प्रेरक० पंखो नाखवो अभिवृष् १ ५० वरसवुं ; छंटकाव करवो अभिवृष्ट वि० वरसाद के छंटकाव थयो होय ते 1 अभिशप १ उ० शाप आपको अभिशस्त वि० खोटो आक्षेप - आरोप मुकायो होय ते अपमानित ( २ ) हमलो करायेलु; ईजा करायेलुं अभिशंक १ आ० शंका करवी ( २ ) -थी डरबुं अभिशंकित वि० वहेमीलु; शंकाशील (२) डरतुं For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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