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साहित्यिक साक्ष्य : २७. एक स्थान पर पावा को हस्तिपाल राजा की पावा कहा गया है तो दूसरे स्थान पर मज्झिमा पावा कहा गया है। ___ इस प्रकार संक्षेप में हम कह सकते हैं कि जैनग्रंथों में बौद्धग्रन्थों जितना व्यवस्थित विवरण नहीं है। फिर भी इतना सत्य प्रतीत होता है कि ये विवरण पावा को मल्लों से सम्बद्ध और कुसीनगर के समीप स्थित होने की ओर संकेत करते हैं।
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