Book Title: KALP Barsa SOOTRA
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar
View full book text
________________
दशाश्रुत छेदसूत्र अन्तर्गत्
“कल्पसूत्रं (बारसासूत्र) (मूलम्) .......... मूलं- सूत्र.[३६] / गाथा.||१|| ....... मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित...... कल्प(बारसा)सूत्रम्" मूलम्
प्रत
सूत्रांक/
गाथांक [३६]
कल्प/यपीणरइअमंसलउन्नयतणुतंबनिदनहं,कमलपलाससुकुमालकरचरणकोमलवरंगुलिं, कुरु-14) ॥१२॥ विंदावत्तवट्टाणुपुत्वजंघे,निगूढजाणुं गयवरकरसरिसपीवरोरुं ,चामीकररइअमेहलाजुत्तकंत
विच्छिन्नसोणिचक्कं जच्चजणभमरजलयपयरउज्जुअसमसंहिअतणुअआइजलडहसुकुमाल-|| मउअरमणिज्जरोमराई नाभीमंडलसुंदरविसालपसत्थजघणं करयलमाइअपसत्थतिवलियमज्झं नाणामणिकणगरयणविमलमहातवणिज्जाभरणभूसणविराइयंगोवंगि, हारविरायंतकुं
दमालपरिणबजलजलिंतथणजुअलविमलकलसंआइयपत्तिअविभूसिएणंसुभगजालुजलेपण मुत्ताकलावएणं उरत्थदीणारमालियविरइएण कंठमणिसुत्तएण य कुंडलजुअलल्लसंतों
सोवसत्तसोभंतसप्पभेणं,सोभागुणसमुदएणं आणणकुटुंबिएणं कमलामलविसालरमणिजलोअणं कमलपज्जलंतकरगहिअमुक्कतोयं लीलावायकयपक्खएणं सुविसदकसिणघणसण्ह
१ मतुवंगिं क० कि०
दीप
अनुक्रम [३८]
~ 29~
![](https://s3.us-east-2.wasabisys.com/jainqq-hq/72ce45cf3350140dc2dbe6c14d0c2dc3167bdbcd15fbda1f726949fd2e382446.jpg)
Page Navigation
1 ... 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144 145