Book Title: Jain Agamo ka Arthashastriya Mulyankan
Author(s): Dilip Dhing
Publisher: Prakrit Bharti Academy
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________________ परिच्छेद चार 66-76 - भ.महावीर के दस श्रावकों की पूंजी - पूंजी और हैसियत - प्रबन्ध - वाणिज्यिक कौशल - संघीय व्यवस्था का निदर्शन - आनन्द आदि श्रावकों का प्रबन्ध कौशल - कार्यों में समन्वय : मुद्रा और विनिमय - पारस्परिक निर्भरता का सिद्धान्त - मुद्रा का आविष्कार - मुद्रा - स्वर्ण-सिक्के - रजतं-सिक्के - ताम्र व अन्य मुद्रा - जैन-सिक्के - क्रय-शक्ति - माप-तौल - वित्तीय प्रणालियाँ - कोष की उपलब्धता - ऋण देना - जमाएँ स्वीकार करना : राजस्व और कर-प्रणालियाँ -- राज्य की आय के स्रोत . : लगान - करारोपण - 18 प्रकार के कर - गृहकर - वाणिज्यकर - अन्य स्रोतों से आय - उपहार व भेंट परिच्छेद पाँच 77-89 (v)
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