Book Title: Sthanang Sutram Part 01
Author(s): Vijaychandrasguptasuri
Publisher: Shripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
View full book text ________________ श्रीस्थानाङ्गं श्रीअभय० वृत्तियुतम् भाग-१ // 481 // होइ दुमराया। इय सुंदरआयरिए सुंदरसीसे मुणेयव्वे // 1 // एरंडमज्झयारेजह साले णाम होइ दुमराया। इय सुंदरआयरिए मंगुलसीसे मुणेयव्वे ॥२॥सालदुममज्झयारे एरंडे णाम होति दुमराया। इय मंगुलआयरिए सुंदरसीसे मुणेयव्वे // 3 // एरंडमज्झयारे एरंडे णाम होइ दुमराया। इय मंगुलआयरिए मंगुलसीसे मुणेयव्वे // 4 // चत्तारि मच्छा पं० तं०- अणुसोयचारी पडिसोयचारी अंतचारी मज्झचारी, 22, एवामेव चत्तारि भिक्खागापं०२०- अणुसोयचारी पडिसोयचारी अंतचारी मज्झचारी, 23, चत्तारि गोला पं० तं०- मधुसित्थगोले जउगोले दारुगोले मट्टियागोले, 24, एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० तं०- मधुसित्थगोलसमाणे 4, 25, चत्तारि गोला पं०२०- अयगोले तउगोले तंबगोले सीसगोले 26, एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० तं०- अयगोलसमाणे जाव सीसगोलसमाणे 27, चत्तारि गोला पं० तं०- हिरण्णगोले सुवनगोले रयणगोले वयरगोले 28, एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०-हिरण्णगोलसमाणे जाव वइरगोलसमाणे 29, चत्तारि पत्ता पं०२०- असिपत्ते करपत्ते खुरपत्ते कलम्बचीरितापत्ते 30, एवामेव चत्तारिपुरिसजावा पं०२०- असिपत्तसमाणेजाव कलंबचीरितापत्तसमाणे 31, चत्तारि कडापं० तं०-सुंबकडे विदलकडे चम्मकडे कंबलकडे 32, एवामेव चत्तारि पुरिसजाया पं० सं०- सुंबकडसमाणे जाव कंबलकडसमाणे 33 // सूत्रम् 349 // चउव्विहा चउप्पया पं० सं०- एगखुरा दुखुरा गंडीपदा सणप्फदा 34, चउम्विहा पक्खी पं० तं०- चम्मपक्खी लोमपक्खी समुग्णपक्खी विततपक्खी 35, चउव्विहा खुड्डपाणा पं० २०-बेइंदिया तेइंदिया चउरिदिया संमुच्छिमपंचिंदियतिरिक्खजोणिया 36 // सूत्रम् 350 // चत्तारि पक्खी पं० 20- णिवत्तित्ताणाममेगे नो परिवतित्ता परिवइत्ता नाम एगेनो निवइत्ता एगे निवतित्तावि परिवतित्तावि एगे नोनिवतित्तानो परिवतित्ता 37, एवामेव चत्तारि भिक्खागा पं० तं०-णिवतित्ताणाममेगे नो परिवतित्ता 4, 38 // सूत्रम् 351 // चतुर्थमध्ययन चतुःस्थानम्, चतुथीद्देशकः सूत्रम् 347-352 मेघाः , करण्डकोपमयाऽऽचार्याः, वृक्ष-मत्स्यगोलक-पत्रकटोपमा आचार्यभिक्षु-पुरुषाः, चतुष्पदपक्षि-क्षुद्रप्राणा:, पक्ष्युपमाः भिक्षवः, निष्कूष्टचतुर्भङ्गयो बुधादि
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