Book Title: Rajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 5
Author(s): Kasturchand Kasliwal, Anupchand
Publisher: Prabandh Karini Committee Jaipur
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चित्र व यंत्र
यंत्र कागज व कपडे पर १०३६४. १-हाथी के चित्र में यंत्र
विशेष—यह चित्र कागज पर है किन्तु कपड़े पर चिपका हुमा है। यह १५ वीं शताब्दी की कला का द्योतक है। हाथी काफी बड़ा है । उस पर देव (द्र) जैठा है। सामने बच्चे को गोद में लिये हुए एक देवी है संभव है इन्द्राणी हो । ऐसा लगता है कि भगवान के जन्मोत्सव का हो। चित्र में लोगों की पगडियां उदयपुरी हैं।
१०३६५. २-पंच हनुमान वीरविशेष-कपडे पर (२०४ २०६च) हाथी, घोड़े तथा हनुमानजी का चित्र है। १०३६६. ३.-श्रुत ज्ञान यंत्रविशेष-भट्टारक हेमचन्द्र का बनाया हया यह यंत्र कपड़े पर है। इसका आकार ३६४४४
१०३६७. ४-काल यंत्र
विशेष—यह उत्सपिणी और अवसर्पिणी काल चक्र का यत्र कपड़े पर है। इसका प्राकार २२४२२ है । इस पर सं० १७४७ का निम्न लेख है
संवत् १७४७ भादवा सुदी १५ लिखतं तेजपाल संबई अगरवाला मगंगोति बाँचे ज्यान म्हां को श्री जिनाय नमः।
१०३६८. ५-तीन लोक चित्र
विशेष--यह यंत्र ४०x२२ ईम के प्राकार वाले कपड़े पर है। यह काफी प्राचीन प्रतीत होता है। इसमें स्वर्ग, नरक तथा मध्यलोक का सचित्र वर्णन है। सभी चित्र १५ वीं या १६ वीं शताब्दी के।
१०३६६. ६-शांतिनाथ यंत्रविशेष-१२४१२ इंच के प्राकार बाले कपड़े पर यह यंत्र है। १०३७०, ७-अढाई द्वीप मंडल रचना
विशेष..यह ३६४३६ इच याकार वाले कपड़े पर है। इसमें तीर्थकरों सथा देवदेवियों प्रादि के मैकड़ों चिन। चित्र १६ वीं शताब्दी की कला के द्योतक हैं तथा श्वेताम्बर परंपरा के पोषक हैं।
१०३७१. ८-नेमीश्वर बारात तथा सम्मेदशिखर चित्र
विशेष—यह ७२ ४३६ इंच के आकार के कपडे पर है। इसमें गिरनार तथा सम्मेदाचल तीर्थ वहां के मंदिरों तथा यात्रियों मादि के चित्र है । चित्रकला प्राचीन है।
प्राप्ति स्थान-(संभवनाथ मंदिर उदयपुर