Book Title: Rajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 5
Author(s): Kasturchand Kasliwal, Anupchand
Publisher: Prabandh Karini Committee Jaipur
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प्राप एवं ग्रंथकार ]
[ १३४७
ग्रंयकार का नाम ग्रंथ नाम प्रथ सूची नयकार का नाम गय नाम अथ सूची पत्र सं०
पत्र सं० लालजीलाल- समवशरण पुजा हि बट्टफेराचार्य- मूलाचार प्रा. १५०
११२० यंगसेन--
वंगसेन सूत्र सं०५६० लालजीतअकृत्रिम चैत्यालय जिन वरबराज
लघु सिद्धान्त कौमुदी पूजा हि०७७७
सं०५११ अढाईद्वीप पूजा हि ७७६
सस्कृत मंजरी सं० ५२० तेरहदीप पूजा हि० ८१६
सार संग्रह सं० २६३ लालदास
इतिहाससार समुन्न हि० वर शर्म- थत बोश्च टीका स. ६०१
१०१४ ० वर्द्धन- गुरगाणा गीत हि० लावण्यसाय-- प्रतरिक्ष पाण्यनाथ
६५२,१०३२ स्तवन हि०७१५
राम सीता गीत हिल हद प्रहार हि०४४० नेमिकमार मीत हि भ. बद्ध मान देव- दराम चरित्र सं० ३८३.
११३८ नेमिनाथ प्रबन्ध हि वद्ध मान कवि
बद्ध मान रास हि० ६:४१ ११४१ वर्द्धमान बेव- श्रु तस्कन्ध पुजा सं० ६१३ नेगिराजमती शतक हि० बर्द्धमान सूरि- गृह शांति विधि सं०७९६ ११२७
धर्मरतम्भ स० २३४ पार्श्वनाथस्तवन गीत
वाग्भट्टालंकार टीका सं. हि० ११२५, ११३७ राजुलनेमि अबोला हि० वराह मिहिर
वृहज्जातक सं० ५६४ १०२७ वल्ह--
चेतन पुद्गल धमाल हि स्थूलमद्र गीत हि० १०२६ लिखमीदास- जसोधर चौपई हिक
पं० बल्लह-- बज्जवली प्रा० ६६४
पं० बल्लाल -- भोज प्रबन्ध सं० ३६४ श्रेणिक चरित्र हिर बलु
पाश्वनाथ स्तुति दि. ४५ ४०७, ४०० प्रा० वसुनन्दि
देवायम स्तोत्र वृत्ति स. लोलिम्बराज- बंद्यजीयन सं० ५९६ वैद्यबहलम सं० १०७७
प्रतिष्ठासार संग्रह सं० साह लोहट- अठारह नाते का चौहा.
पर लिया हि० ४२१,१५१,
मूलाचार वृत्ति सं० १५१ १०६२
वसुनंदि श्रावकाचार सं० पूजाष्टक दि० ८७६ यशोधर चरित्र भापा हि० ७० वस्तुपाल- रोहिणी व्रत प्रबंध हि.
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