Book Title: Rajasthan ke Jain Shastra Bhandaronki Granth Soochi Part 5
Author(s): Kasturchand Kasliwal, Anupchand
Publisher: Prabandh Karini Committee Jaipur

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Page 1423
________________ पंच एवं ग्रंथकार ] ग्रंथकार का नाम ग्रंथ नाम नप सूची प्रकार का नाम नथ नाम ग्रंथ सूची पत्र स० पत्र सं० सारोद्धार हि १११६ हरिदस नागमाला सं०५३८, हर्षगरिण पदहि . १८३ हर्षचन्द्र- . पद हि० १०७३ (स्वामी हरिदास-- पद संग्रह हि० १०६६ पूजाष्टक हि ६६७ हरिनाथ वैद्य जीमन टोका सं. हस्तिरुधि- वैद्यदल्लभ सं०५८६ ५८८ हरिकृष्ण पाण्डे- अनन्नयन कथा लि हरिफूला- सिंहासन बत्तीसी हिक भाकाश पंचमी कथा हरिभन्न सूरि- जम्बुद्धीप संघवरित प्रार हरिभ गरिण--- कर्मविपाक कथा हि. ज्योतिषशास्त्र सं. ५४७ ताजिकसार सं० ५४६ लघु पंचकल्याण पूजा हरिभान ज्येष्ठजिनवर कथा हि० वृत्तरत्ना वृत्ति सं० ६०० छंदरत्नावलि हि. हरिभास्कर दशलक्षगावत कथा हि ४३३ हरिरामदास निरंजनीनिर्दोषसप्तमी कथा हि हरिषेण - निःशल्य अप्टमी वाथा हिर ४३३ हरिकिशनपुरन्दर विधान कथा हि० माराधना कथाकोश सं रत्नत्रय कथा हि० ४३३ दशलक्षगा कथा अपभ्रस हरिचन्द हीराचन्द - होरालाल हरिचन्द संघी-- कवित्त हि १०५४ चौबीस महाराज की विनती हि ७२५, हीरानंद.. १०४६ धर्मशर्माभ्युदय सं० ३३६ मणिपति चरित्र प्रा० कथाकोश सं. ४२२ पंचकल्याणक विषान हि. ८५. भद्रबाहु कथा हि०४६५ पद सग्रह हि. ६६४ चन्द्रप्रभचरित्र भाषा हि २७६, १२२ चौबीसतीर्थर पूजा हि ८०२,६१० एकीभाव स्तोत्र भाषा हि०१०१३ पंचास्तिकाय भाषा हि ७३, ११४६ मंगलाचरण हि १०१५ समवशरण विधान हि १२१ हरिचन्द - हरिचन्द सूरि षड्दर्शन समुच्चय सं०

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