Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek, 
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 9
________________ Jain Educationa In | सहित जो सर्व दिशाउंमां बिजली देखाय, तो आषाढ महीनाना ते नक्षत्रमां पृथ्वी जलथी संपूर्ण थाथ, सुकाल थाय, धान्यनी उत्पत्ति याय, तथा पृथ्वी मां आनंद याय. ॥ ७ ॥ ८ ॥ चतुर्थीपंचमी षष्ठ्यां, अश्लेषा च मघा तथा । यदा च पूर्वफाइ, त्रिरात्रंवर्षते ध्रुवम् ॥ ए ॥ अर्थ-वली मागसर मासनी चोथ, पांचम, अने बने दिवसे, अभ्लोषा, मघा, तथा पूर्वाफागुनी नक्षत्र जो होय, तो खरोखर त्रण दिवससुधि वरसाद थाय ॥ ए ॥ अष्टमी नवमी चैव, चित्रनक्षत्रसंयुता । श्राषाढे श्वेतपदेच, तद्दिने वर्षते ध्रुवम् ॥ १० ॥ अर्थ- मागसर मासनी आम ने नोम जो चित्र नक्षत्र सहित होय, तो आषाढ मासना शुक्ल पक्षमां ते दिवसोए खरेखर वरसाद थाय. ॥ १० ॥ | नवमी दशमी चैव, एकादशी यदा जवेत् । स्वातिनक्षत्र संयुक्ता, शस्यनाशो जलं विना ११ अर्थ - मागसर मासनी नोम, दशम, तथा अग्यारस जो स्वाति नक्षत्रवाली होय, तो पाणी विना खेतीनो नाश श्रशे, एम जावुं ॥ ११ ॥ व्यवहारकल्पमां श्री हरिजप्रसूरिजी पण कहे वे के, मार्गशीर्षनवमी दशमी चैकादशी च तिथिरत्र कराला स्वातिकसहिता सितपक्ष्या शस्यनाशक लिता कलिताका ॥ १२ ॥ For Personal and Private Use Only inelibrary.org

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