Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek, 
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 10
________________ मेघमाला विचार. अर्थ-मागसर मासना शुक्ल पदनी नोम, दशम, अने अग्यारसनी तिथी, जो स्वाति नक्षत्र सहित होयII तो तेने जयंकर, धान्यनो नाश करनारी तथा कष्ट उपजावनारी जाणवी. ॥१॥ ॥४॥ छादश्यां च त्रयोदश्यां,चतुर्दश्यां तथैव च।अमावास्यांतथाचस्या,नक्षत्रंचमघानिधम्१३] संध्याकालश्च तासुचेन्, मेघबिंऽसमन्वितः।आषाढे श्वेतपदे तु,वर्षते नात्र संशयःयुग्मम् अर्थ-मागसर मासनी बारस, तेरस, चौदस तथा अमासने दिवसे जो मघा नक्षत्र होय, अने ते तिथीउनो संध्याकाल जो मेघना बिंउड सहित होय, तो आषाढ महिनाना शुक्ल पक्षमा वरसाद वरसे, तेमा संशय नथी.॥ १३ ॥१४॥ एवी रीते मागसर मासनो विचार जाणवो. हवे पोश मासनो विचार कहेछे. पौषे शुक्लचतुर्थ्यां तु, विद्युतादर्शनंशुजम्।अभ्रउन्नं नजःश्रेष्ट, मस्यामिऽधनुस्तथा ॥१॥ | अर्थ-पोश मासनी शुक्ल चतुर्थीने दिवसे, जो विजली देखाय, आकाश वादलांथी ज्वाएलु देखाय, मला तथा जो इंजधनुष्य देखाय, तो ते उत्तम जाणवां. ॥१॥ मेषपदं गतश्चंसो, गर्जनं पूर्व दिग्गतम्।कुंमलं च तथा जानौ, सुनिदं जायते तदा ॥२॥ RSS RSS ४॥ Jain Educational A nal For Personal and Private Use Only R ainelibrary.org

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