Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek, 
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 45
________________ अर्थ- ज्येष्ठ मासना शुक्लपक्षमा जे तिथि पेहेली होय, ते कया वारवाली श्रावे , तेनी प्रयत्न पूक शोध करवी.॥१॥ नानुना पवनो वाति, कुजो व्याधिकरो मतः। राजपुत्रेण निदं, नवति हि न संशयः॥२॥ | अर्थ- जो जेठ शुद पडवाने दिवसे रविवार होय, तो पवन (घणो) वाय, मंगलवार होय तो व्याधि करे, बुधवार होय तो उकाल थाय, तेमां बिलकुल संशय नथी. ॥२॥ all गुरुनार्गवसोमानां, यद्येकोऽपि हि जायते।जलेन पूरिता पृथ्वी, धनधान्यं च संमतम् ॥३॥ N अर्थ- वली ते पडवाने दिवसे जो गुरु, शुक्र के सोमवारमांथी एक पण होय, तो पृथ्वी जलथी नल राय, अने घणुं धान्य थाय.॥३॥ कदाचिदैवयोगेन, शनिवारो यदा नवेत्। जलैर्विना प्रजानाश-छत्रनंगश्च जायते ॥४॥al NI अर्थ- कदाचित् दैवयोगे ते दिवसें जो शनिवार होय, तो पाणीविना प्रजानो नाश अने उत्रनंग थाय. श्राओदीनि च दाणि, ज्येष्ठशुक्ने निरीक्षयेत्। सान्राणि हन्यते वृष्टिं, निरत्रे वृष्टिरुत्तमा all अर्थ- ज्येष्ठ मासना शुक्लपक्षमा आजै आदिक नक्षत्रो जोवां, जो ते वादलांउसहित होय, तो ते वृष्टिनो नाश करे , अने जो वादलांन रहित होय, तो उत्तम वृष्टि श्राय . ॥ ५॥ ज्येष्ठमासस्य शुक्ने हि, पकेऽत्र द्वितीयादिने।गर्जनं यदि जायेत, वृष्टिनैव जवेध्रुवम्॥६॥ JainEducationained For Personal and Private Use Only nelibrary.org

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