Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek, 
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 44
________________ मेघमा विचार अर्थ- वैशाख मासना कृमपदनी वादलांजेवाली, अने सोमवारें करीने युक्त एवी पंचमी राज्यनो नंग करनारी जणाएदी बे. ॥२०॥ नवमी दशमी चैव, विद्युजियदि संयुता।कृष्लपदया हि वैशाखे, मेघबन्नप्रजाकरा ॥२॥ तदाषाढे कृमपके,वृष्टिनवति निश्चितम्। महिला व नदीवेगा, उछलंति जलैर्युताः॥३॥ अर्थ- वैशाख मासना कृष्णपदनी नोम अने दशम जो विजलीए करीने संयुक्त, तथा वादलाउथी बवाएला सूर्यवाली होय, तो असाड मासना कृमपदमां खरेखर मेघवृष्टि थाय, अने जलोथी जराएला नदीउँना प्रवाहो गांडा माणसोनी पेठे उबट्या करे . ॥ २५ ॥ ३० ॥ वैशाखस्य चामावास्या, मेघगर्जसमन्विता। सूर्यास्तसमये नूनं, शस्यनाशप्रदा मता ३१ अर्थ-वैशाख मासनी अमास जो सूर्यास्त समये मेघना गर्जारववाली होय तो खरेखर ते धान्योनो नाश करनारी मानेली . ॥ ३१॥ एवीरीते वैशाख मासनुं स्वरूप जाणवू. हवे ज्येष्ठ मासनुं स्वरूप कहेछे ज्येष्ठस्य प्रथमे पदे, या तिथिःप्रथमा नवेत्। श्रायाति केन वारेण, तामन्वेषय यत्नतः॥१॥ भा॥ १॥ Jain Educationa a l For Personal and Private Use Only ainelibrary.org

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