Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek,
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
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चार
मेघमा
अर्थ- आषाढ मासना शुक्लपक्षमा रोहिणीनो योग उत्तम जाणवो, तथा वादलां, विजली अथवा
|| गर्जना धान्यनी उपजने देनारां मानेला . ॥ ५॥ nunान वृष्टी रोहिणीयोगे, नच पूर्वोत्तराजलम्। आषाढेच यदा जातं,तदार्जिवसंजवः ॥६॥
अर्थ- आषाढ मासमां रोहिणीनो योग अते उते जो वृष्टि न आय, तेम पूर्वाषाढा अने उत्तराषाढा-N जल पण न पडे, तो उकालनो संनव जाणवो. ॥ ६॥ माघे फाल्गुने मासि, चैत्रवैशाखयोस्तथा।आषाढे खातियोगश्च, सर्वशस्यप्रदः स्मृतः॥ly __ अर्थ- माहा, फागण, चैत्र, वैसाक अने आषाढ मासमां स्वाति नक्षत्रनो योग सर्व धान्योने देनारो जणाएलो . ॥७॥ नवम्यां तिथावाषाढे, शुक्लायां निर्मलो रविः। उदये चापि मध्याह्ने, निरजं यदिचांबरम् | वर्षते चतुरो मासाः, सर्वधान्यफलप्रदाः। तृणानामपि निष्पत्ति, र्जायते पशुतोषदाः ॥ __ अर्थ- आषाढ मासना शुक्लपक्ष्नी नोमने दिवसे जो सूर्य निर्मल होय, तथा सूर्योदय समये अने मध्यान्हकाले आकाश वादलांट रहित होय, तो सर्व धान्योनां फलोने देनारा एवा चारे मासोमां वरसाद थाय, अने पशुज्रने संतोष देनारी एवी घासनी उपज थाय. ॥ ७ ॥ ए॥ आषाढे चैव संक्रांतो, यदि वर्षति माधवः।व्याधिरुत्पद्यते घोरा, मनुष्यपशुनाशदा ॥१॥
MARA
G॥२५॥
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