Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek,
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
View full book text
________________
TONI
अर्थ-वली ते संक्रांतिने दिवसे जो शनिवार होय, तो धान्योनुं मूट्य त्रणगj, मंगलवार होय तो
विचार. चोगणुं, बुद्ध अने शुक्रवार होय तो तुझ्य, तथा जो गुरु अने सोमवार होय तो अरधुं मूट्य जाणवु.॥१॥ वर
शनिजानुकुजे वारे, संक्रांतिश्च नवेद्यदा।धान्यमूल्यस्य वृद्धिश्च, जायते राज्यविवरम् १ए। IN अर्थ-ज्यारे शनि, रवि अने मंगलवारे संक्रांति होय, त्यारे धान्योना मूटयनी वृद्धि, तथा राज्यमां|
विग्रह थाय. ॥ १५ ॥
शन्यर्कनौमवारे तु,संक्रांती मृगकर्कयोः। यदा तदानमूल्यस्य, वृद्धिःसंजायते ध्रुवम् ॥२०॥ । अर्थ-मकरसंक्रांति अने कर्कसंक्रांति जो शनि, सोम अथवा मंगलवारी होय, तो खरेखर धान्यनाk
मूट्यनी वृद्धि थाय . ॥२०॥ | पौषस्य पूर्णमास्यांच,संध्याकाले नवेद्यदि।मेघैश्छन्नो निशानाथः,पीतवर्णैर्मनोहरैः॥२१
तदा वैश्वानरोत, जयो जगहिनाशकः।कथितश्चंतप्रज्ञप्त्यां, सर्वशास्त्रविचक्षणैः युग्मम् । ___ अर्थ-वली पोससुदी पुनेमने दिवसे संध्याकाले चंड़ जो मनोहर एवा पीला रंगना वादलांनी उवाएलो होय, तो जगतने नाश करनारो एवो अग्निथी उत्पन्न भएलो जय थाय, एम सर्व शास्त्रोमां विचक्षण एवा ( जिनेश्वरोए) चंपन्नत्तिमां कहेलु . ॥ २१॥२२॥ तदिने नौमवा रश्चे, चंतश्चैव प्रजोन्फितः।बालमृत्युप्रदो शेयो, माघमासस्तदाखिलः२३||
Jain Educational
For Personal and Private Use Only
Mainelibrary.org

Page Navigation
1 ... 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68