Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek, 
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 18
________________ मेघमा विचार. | अर्थ- महा सुदी पांचमने दिवसे त्रण घमी दिवस गयाबाद सूर्यनुं बिंब जो लाल रंगनुं पाय, तो धा- न्यनो नाश आय. ॥ ११॥ तदिने शनिवारश्चे,झीमवृष्टिनवेत्तथा। तदा जुवि महामारी, चैत्रे नवति निश्चितम् ॥१२॥ अर्थ- महासुदी पांचमने दिवसे जो शनिवार होय, अने वली हिमनी वृष्टि श्राय, तो पृथ्वीमां चैत्र IN|मासमां खरेखर मरकीनो मोटो उपध्व थाय. ॥ १२॥ षष्ट्यां च माघशुक्लस्य, सूर्यास्तसमये खलु । दृश्यते सर्ववर्णाढ्य, मिंडचापो यदांवरे ॥१३॥ तदा वृष्टिनवेठीघ्रं,तस्यामेव निशिध्रुवम्। निष्फलैव महारोग,दायिनी देहिनां सदा ॥१४॥ अर्थ- वली महासुदी उच्ने दिवसे सूर्यास्त समये आकाशमां सर्व रंगोवालु जो इंधनुष्य देखाय तो खरेखर तुरत तेज रात्रिए निष्फल तथा प्राणीउने हमेशां महारोगनी आपनारी एवी वृष्टि थाय.॥१३॥१४ माघशुक्लस्य षष्ठीचे, निवारान्विता यदा।कृष्णपदे तदाषाढे, वृष्टिर्जवति निश्चितम् ॥ अर्थ- महासुदी उठ जो शनिवारी होय, तो खरेखर असार महिनाना कृलपदमा वृष्टि श्राय. ॥१५॥ गतायां घटिकापंच, रात्रौतत्रदिने यदा। तारकाणां नवेत्पातः,प्रतीच्या मनिवारितः॥१६॥ पशूनां च तदा नाशो, जवति हि तृणैर्विना। यतो बिंपुरपिवृष्टे,जवति नो वर्षावधिम् ॥१७॥ Jain Educational nal For Personal and Private Use Only N a inelibrary.org

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