Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek,
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
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Jain Educational
- माहासुदी सातमने दिवसे संध्याकाले जो पूर्व दिशामां जलसहित वादलांनो समूह ( होय ) तो 5कालनो संभव जाणवो ॥ २१ ॥
| माघशुक्लस्यचाष्टम्यां जोमवारो यदा जवेत् । श्राच्छादितस्तथासूर्यः, सूर्यास्तसमये यदिश् | नीलवर्णैर्महामेघे, निष्कंपैश्च किलोन्नतैः । तदा धान्यस्य मूल्यं हि, जायते द्विगुणं महौ ॥ २३ ॥
अर्थ- वली महासुदी आमने दिवसे जो मंगलवार होय, तथा सूर्यास्तसमये सूर्य जो लीलारंगना, निकंप, ने उंचां वादलांथी आबादित थएलो होय तो खरेखर या पृथ्वीमां धान्यनुं मूल्य बेवडुं थायडे. माघशुक्लस्य चाष्टज्यां, शनिवारो यदा भवेत् । तदा वृष्टिः शुभाचोक्ता, चतुर्मासि जिनाधिपैः अर्थ- वली महासुदि श्रवमने दिवसे जो शनिवार होय, तो चतुर्मासमां सारी मेघवृष्टि याय, एम जिनराजो कहेलुं d. ॥ २४ ॥
नजसि हि प्रजाते च, माघ शुक्लाष्टमी दिने । इंद्रचापो यदा त्वर्धा, दृश्यते घटिकावधि ॥२५ | तदा मारीसमुत्पातो, जायते जननाशकः । विदेशगमनं कार्यं, ततो जीवितवां विनिः ॥ २६ ॥
- वली महासुदी श्रामने दिवसे प्रजातमां जो एक घडीसुधि रधुं इंद्रधनुष्य देखाय, तो माण| सोने नाश करनारो मरकीनो उपद्रव थाय, माटे जीवितना इक लोकोए परदेशमां जनुं ॥ २५ ॥ २६ ॥ | जायते तद्दिने चैवं, धूलिवृष्टिर्यदांबरे । मध्यान्हे नैकते जागे, तदा दुष्काल संजवः ॥ २७ ॥
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