Book Title: Meghmala Vichar
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek, 
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 24
________________ विचार. मेघमा० अर्थ- वली ते दिवसे जो रविवार होय, अने आकाश पाणीश्री जीजाएलुं होय, तथा लेक सूर्यास्त- सुधिनो सूर्य न देखाय, तो स्फोटक (शीतला) आदिक महारोगोथी पशुओनो नाश थाय, एम श्रीजिने श्वरोए कहेढुंचे. ॥ ३० ॥३॥ ॥११॥ तदिने नोमवारश्चे,त्पूर्व दिक्चैव नूषिता।श्याममेधैस्तदा वृष्टि,राषाढे हि न संशयः ॥४॥ ___ अर्थ- वली ते दिवसे जो जोमवार होय,अने पूर्व दिशा जो श्याम रंगनां वादलांउथी जूषित भएली | || होय, तो आषाढमासमां खरेखर वृष्टि श्राय, तेमां संशय नथी. ॥ ४० ॥ लातदिने चांबरे प्राच्यां, निशीथे यदि जायते।पतनं तारकाणां च,राज्यबंशो न संशयः॥४१॥ अर्थ- वली ते दिवसे आकाशमा पूर्व दिशामां मध्यरात्रिए जो ताराश्रोनुं खरवु थाय, तो राज्यनो || IN नाश थाय, तेमां संशय नथी. ॥१॥ तदिने धूमकेतोश्च, दर्शनं यदि जायते। निशितदा जनानां हि नाशो जवति मारीतः॥४॥ अर्थ- वली ते महासुदी नोमने दिवसे रात्रिए जो धूमकेतुनुं दर्शन थाय, तो खरेखर मरकीश्री माणसोनो नाश थाय. ॥ ४॥ तहिने च निशानाथे,संध्याकालेऽनिलैर्युते। दृश्यते शंखचिन्हं चेत् तदा वृष्टेरसंचवः॥४३॥ अर्थ-वली ते दिवसे वायुसहित एवा संध्याकाले चंजनी अंदर जो शंखनु चिन्ह दखाय,तो वृष्टि न पाय ॥११॥ Jain Educational nal For Personal and Private Use Only G ainelibrary.org

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