Book Title: Gnatadharmkathanga Sutram Part 03
Author(s): Kanahaiyalalji Maharaj
Publisher: A B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti

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Page 820
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir अनगारधामृतवषिणी टी० श्रु. २ व. १ ० १ कालीदेवीवर्णनम् ८१. दन्ती, अतएव अवसन्नविहारिणी, 'कुसीला ' कुशीला-उत्तरगुणसेवया संज्वलनकषायोदये प्रवृत्ता, अतएव कुशीलविहारिणी, 'अहाच्छंदा' यथाच्छन्दास्वाभिप्रायपूर्वकस्वमति कल्पितमार्गे प्रवृत्ता, अतएव यथा छन्दविहारिणी, 'संसत्ता' संसक्ता गृहस्थादिप्रेमबन्धनेन शिथिलसामाचारीप्रवृत्ता सती बहूनि वर्षाणि श्रामण्यपर्यायं पालयति, पालयित्वा अर्द्ध मासिक्या संलेखनयाऽऽत्मानं 'झूसेइ ' जोषयति-सेवते, झूसित्ता-जोपयित्वा त्रिंशद् भक्तानि 'अणसणाए ' अनशनया 'छेएइ' छिनत्ति, छित्त्वा तस्य स्थानस्य अनालोचिताऽ प्रतिक्रान्ता कालमासे कालं कृत्वा चमरचञ्चायां राजधान्यां कालावतंसके भवने उपपातसभायां देवशयनीये देवदृष्यान्तरिते = देवदूष्यवस्त्राच्छादिते अङ्गुलस्याऽसंख्येयभागमात्रायामवगाहनायां कालीदेवीतया उपपन्ना । ततः खलु सा कालीदेवी अधुनोपालन करने में शिथिलता दिखलाने लगी-अवसन्न विहारिणी हो गई। कुशीला बन गई-संज्वलन कषाय के उदय होने से उत्तरगुणों की विराधना करने लगी-कुशील विहारिणी हो गई और अपनी इच्छानुसार मार्ग की कल्पना कर उसमें प्रवृत्त रहने लग गई-इसलिये वह यथाच्छन्द विहारिणी भी धन गई । गृहस्थ आदि जनों के अधिक परिचयजन्य प्रेमबंधन से अपने आचार पालन में शिथिल बनी हुई उसने इस तरह होकर अनेक वर्षों तक श्रामण्य पर्याय का पालन किया और (पाउणित्ता) पालन कर (अद्धमासियाए संलेहणाए अत्ताण झुसेह, झूसित्ता तीसं भत्ताई अणसणाए छेएइ, छेइत्ता, तस्स ठाणस्स अणा. लोइय अपडिक्कंत्ता कालमासे कालं किच्चा चमरचंचाए रायहाणीए कालवर्डिएस भवणे उववायसभाए देवसयणिज्जंसि देवदूसंतरिए अंगुलવિહારિણી થઈ ગઈ. સમાચારી પાલન કરવામાં શિથિલતાવાળી બતાવવા લાગીઅવસગ્ન વિહારિણી થઈ ગઈ. કુશીલા થઈ ગઈ, સંજવલન કષાયને ઉદય હોવાથી ઉત્તર ગુણેની વિરાધના કરવા લાગી, કુશિલ વિહારિણી થઈ ગઈ અને પિતાની ઈચ્છા મુજબ માગની કલ્પના કરીને તેમાં પ્રવૃત્ત થવા લાગી, એથી તે યથાસ્કન્દ વિહારિણી પણ બની ગઈ. ગૃહસ્થ વગેરે લેકેના વધારે પડતા પરિચયજન્ય પ્રેમબંધનથી પિતાના આચાર પાલનમાં શિથિલ થઈ ગઈ. તેણે આ પ્રમાણે ઘણાં વર્ષો સુધી શ્રમણ્ય-પર્યાયનું પાલન કર્યું અને (पउणित्ता ) पासन रीन ( अद्धमासियाए संलेहणार अत्ताणं झूसेइ, झूसिवा तीसं भत्ताई अणसणाए छेएइ, छेइत्ता, तस्स ठाणास अणालोइयअपडिव कंत्ता कालमासे कालं किच्चा पमर व १०१ For Private and Personal Use Only

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