Book Title: Arhat Vachan 1999 01
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 16
________________ का उल्लेख अपनी पुस्तक में किया गया है और उनमें विराजमान कुछ प्रतिमाओं को, जो नदी से प्राप्त हुई थीं, 1800 व 2000 वर्ष प्राचीन बतलाया है। एक अन्य उल्लेखनीय जैन मूर्ति का विवरण मिलता है जो बादुलाडा गाँव थाना उम्दा जिला बाबुदा में है। यह पार्श्वनाथ भगवान की खङगासन श्यामवर्ण की प्रतिमा है। यह मंदिर और प्रतिमा पुरातत्व विभाग बंगाल सरकार के अधीन है। पं. बाबूलाल जैन जमादार ने इसे 1800 वर्ष प्राचीन बताया है। सराक क्षेत्र में देश भर की अपेक्षा से अधिक प्राचीन व अधिक संख्या में मूर्तियां मिलती हैं। अनाईजामबाद की मूर्तियों को उपाध्याय श्री ज्ञानसागरजी महाराज की प्रेरणा से मंदिर निर्माण कर सुरक्षित कर लिया गया है। पाकवीरा इस क्षेत्र का अन्य महत्वपूर्ण स्थान है। कितनी ही मूर्तियों के सिर काट लिये गये हैं और निश्चित ही अनेक छोटी-बड़ी मूर्तियाँ गायब हो गई होंगी। समाज के लोगों को इस सम्बन्ध में विचार करना चाहिए। हमारी मान्यताएं क्षेत्र विशेष से जुड़ गई हैं जबकि जैन धर्म से जुड़नी चाहिए। दान देते समय पात्रता का विचार करने के लिए हमारा शास्त्र व मुनिवर्ग बार - बार कहते हैं। निर्माण आदि के लिए किया गया दान यदि सराक क्षेत्र में उपयोगी हो सके तो हमारी संस्कृति का यह वैभव अधिक अक्षण्ण रह सकेगा। आवश्यकता है एक ऐसे फण्ड की जिसमें न्यनराशि का निवेश किया जा सके। आवश्यकता है प्रचार की कि यह भूमि कितनी पवित्र है और कितना आवश्यक है यह निश्चित करना कि विस्मृत रह चुका यह क्षेत्र जैन समाज का गौरव है। सम्मेदशिखर की ओर जब तीर्थंकरों ने अपने चरण बढाये होगें तो इसी भूमि पर होकर। कांसा नदी से प्राप्त अनाइजामबाद (जि. पुरुलिया प. बंगाल) की मूर्तियाँ हमारे इन संस्कारों को मुसलमानों ने ही विनष्ट नहीं किया अपितु हिन्दू धर्म के मानने वाले कुछ राजाओं ने अपने धर्मान्ध सलाहकारों के प्रभाव में आकर भी यह किया 14 अर्हत् वचन, जनवरी 99

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