Book Title: Arhat Vachan 1999 01
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 71
________________ ज्ञानपीठ के प्रांगण से उदासीन आश्रम में पुस्तक विक्रय केन्द्र की स्थापना दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम, इन्दौर गत 85 वर्षों से विभिन्न माध्यमों से समाज सेवा कर रहा है। 1987 में इसी के अन्तर्गत कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ की स्थापना की गई थी जिसके अन्तर्गत सुविधा सम्पन्न पुस्तकालय का विकास, त्रैमासिक शोध पत्रिका अर्हत् वचन का प्रकाशन, जैन पुरातत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों का सर्वेक्षण एवं आख्याओं का प्रकाशन एवं परीक्षा संस्थान का संचालन किया जा रहा है। पुस्तक विक्रय केन्द्र का शुभारम्भ करते हुए श्री देवकुमारसिंह कासलीवाल आश्रम की नवीन गतिविधियों के अन्तर्गत दिनांक 27.11.98 को पूज्य आचार्य श्री पुष्पदन्तसागरजी महाराज के मंगल सान्निध्य में आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री देवकुमारसिंह कासलीवाल के करकमलों से पुस्तक विक्रय केन्द्र का शुभारम्भ हुआ। आश्रम के अधिष्ठाता ब्र. अनिल जैन ने बताया कि इन्दौर महानगर में जैन धर्म के साहित्य के बिक्री केन्द्र की आवश्यकता का दीर्घकाल से अनुभव किया जा रहा है, इस केन्द्र की स्थापना से इस अभाव की पूर्ति होगी। इस केन्द्र पर देश के सभी स्थानों एवं सभी संघों से प्रकाशित सत्साहित्य सुलभ कराया जायेगा। अब तक लगभग 1,00,000 %D00 रु. के साहित्य की बिक्री की जा चुकी है। सभी पुस्तक प्रकाशन संस्थाओं एवं पूज्य मुनिसंघों से सविनय निवेदन है कि वे अपने द्वारा प्रकाशित उपलब्ध साहित्य की 1-1 प्रति (नमूना प्रति) व्यावसायिक शर्तों सहित भिजवाने का कष्ट करें जिससे विक्रय केन्द्र पर उनको आवश्यकतानुसार मंगाकर जन सामान्य को सुलभ कराया जा सके। नमूना प्रतियाँ विक्रय नहीं की जायेंगी, उन्हें पुस्तकालय में सुरक्षित रखा जायेगा। राष्ट्र की धड़कनों की अभिव्यक्ति हिन्दी का प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक नवभारत टाइम्स अर्हत् वचन, जनवरी 99 69

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