Book Title: Arhat Vachan 1999 01
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 83
________________ वर्ष - 11, अंक - 1, जनवरी 99; 81-96 अर्हत् वचन (कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर) भगवान ऋषभदेव राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन जम्बूद्वीप (हस्तिनापुर), 4-6 अक्टूबर 1998 कार्य विवरण - डा. अनुपम जैन* परम पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी के ससंघ सान्निध्य में दि. जैन त्रिलोक शोध संस्थान, हस्तिनापुर एवं चौधरी चरणसिंह वि.वि., मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में 4-6 अक्टूबर 98 के मध्य त्रिदिवसीय भगवान ऋषभदेव राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन के 6 सत्रों में 20 कुलपति, पूर्वकुलपति, कुलपति प्रतिनिधि तथा 111 विद्वान सम्मिलित हुए। इसके अतिरिक्त प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चन्दनामतीजी तथा क्षुल्लक श्री मोतीसागरजी सहित 18 संतों एवं व्रती विद्वानों/बहनों की गौरवमयी उपस्थिति सम्मेलन की गरिमा में अभिवृद्धिकारक रही। सम्मेलन के माध्यम से देश के अकादमिक जगत को नेतृत्व प्रदान करने वाले माननीय कुलपतियों को जैन विद्या के अध्येताओं के साथ बैठकर विचार विमर्श करने तथा अपने-अपने विश्वविद्यालयों में भगवान ऋषभदेव की शिक्षाओं एवं भारतीय संस्कृति पर उनके व्यापक प्रभाव के विश्लेषण हेतु योजनाओं के निर्माण का अवसर प्राप्त हुआ। सम्मेलन के समापन अवसर पर समागत कुलपतियों की ओर से व्यक्त किए गए प्रो. बलबीरसिंह भसीन, प्रतिकुलपति - मगध वि.वि., बोधगया (बिहार) के विचार दृष्टव्य हैं। 'इस सम्मेलन से हम लोगों की जैन धर्म के प्रति बहुत सारी भ्रातियाँ दूर हुई हैं। आज हम इसके वास्तविक तथ्य से परिचित हुए हैं। अब मैं निश्चित रूप से राष्ट्रीय शिक्षा विभाग से संपर्क करके सरकारी पाठ्य पुस्तकों में निहित भ्रांतियों को दूर कराऊँगा। मेरा इस जम्बूद्वीप (दि. जैन त्रिलोक शोध) संस्थान से अनुरोध है कि आप हम लोगों को जोड़े रखें तथा इस सम्मेलन का समापन करके इतिश्री न कर दें, क्योंकि आपके इस परिश्रम एवं आर्थिक व्यय के दूरगामी परिणाम शीघ्र ही सामने आएंगे।' सम्मेलन के विभिन्न सत्रों की संक्षिप्त आख्या निम्नवत है। दिनांक 4.10.98 मध्यान्ह 2.00-4.30- प्रथम सत्र-उद्घाटन सत्र मुख्य अतिथि - सांसद श्री राजेश पायलट, पूर्व केन्द्रीय मंत्री - भारत अध्यक्षता - सांसद श्री धनंजयकुमार, पूर्व केन्द्रीय मंत्री-भारत विशिष्ट अतिथि- श्री प्रदीपकमार सिंह कासलीवाल. राष्टीय अध्यक्ष - दि. जैन महासमिति श्री माणिकचंद पाटनी, राष्ट्रीय महामंत्री-दि. जैन महासमिति मंगलाचरण - पीठाधीश क्षुल्लकरत्न श्री मोतीसागरजी महाराज, जम्बूद्वीप (हस्तिनापुर) संचालन - कर्मयोगी ब्रह्मचारी रवीन्द्रकुमार जैन, अध्यक्ष - जम्बूद्वीप (हस्तिनापुर) जम्बूद्वीप के पीठाधीश क्ष. मोतीसागरजी ने मंगलाचरण के उपरांत देश के सदर अंचलों से पधारे माननीय कुलपतियों का अभिनंदन करते हुए उनका आह्वान किया कि वे युगपुरूष भगवान ऋषभदेव की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाएं क्योंकि वे ही ऐसा करने में सक्षम है। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों का जन्म उत्तर भारत में हुआ किन्तु उपदेशों का प्रचार करने वाले महान आचार्यों का जन्म दक्षिण भारत में हुआ। यह एक सुखद संयोग है कि आज उत्तर-दक्षिण दोनों भागों के अनेक कुलपतिगण तथा देश के लगभग सभी प्रांतों से पधारे माननीय विद्वत् जन मंच पर उपस्थित हैं। * मंत्री- भगवान ऋषभदेव राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर-250404 (मेरठ), निवास-शानछाया, डी-14, सुदामानगर, इन्दौर-452009

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