Book Title: Arhat Vachan 1999 01
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 60
________________ मुनिश्री देखिये, क्या होता है। साधू तो प्रेरणा ही दे सकते हैं, करना तो समाज को है। अनुपम महाराजजी विषय तो बहुत हैं, आपने जो साहित्य दिया है उसका अध्ययन भी करूँगा, किन्तु आज युवा होने के नाते मैं विशेष रूप से इस विषय पर युवाओं से आपकी अपेक्षायें जानना चाहूँगा। - मुनिश्री समाज की शक्ति युवाओं में ही होती है। अतः वे जिस काम में जुट जायें उसमें सफलता निश्चित है। मैं कुछ सुझाव देना चाहूँगा - क. सराकोत्थान हेतु अ. भा. दि. जैन सराक ट्रस्ट द्वारा प्रवर्तित योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु समाज में वातावरण बनायें। ब. वे एक टीम बनाकर सराक क्षेत्र में जायें। वैसे भी युवा तीर्थ यात्रा या देशाटन हेतु जाते ही हैं। सराक क्षेत्र में जाने से उन्हें अच्छे अनुभव होंगे। रोमांचक यात्रा की अनुभूति होगी। देश की संस्कृति को नजदीक से देखने का सुखद अवसर प्राप्त होगा। इसके साथ ही जब वे अपने बन्धुओं के बीच जाकर उनकी समस्यायें सुनेंगे, तब उनके समाधान में सहयोग देने हेतु वे सहज ही प्रेरित होंगे। हर काम धन से ही नहीं होता। अपने भाइयों से चर्चा करने से सौहार्द्र एवं प्रेम बढ़ेंगे। वे लोग समाज से जुड़े यह बात बहुत जरूरी है। समाज के आम आदमी का जुड़ाव आन्दोलन की सफलता की कुंजी है। पाकबिरा (पुरलिया) स्थित विशाल मूर्ति 58 अनुपम - इसके अतिरिक्त । मुनिश्री विभिन्न सम्मेलनों, सभाओं में सराक भाइयों की समस्याओं को प्रमुखता से उठायें, इस सबसे प्रचार तो होता ही है, आन्दोलन को गति मिलती है। अनुपम - आपने प्रचार की बात की है तो कृपया पत्रकारों को भी कुछ सन्देश दें। (हँसी) मुनिश्री पत्रकार क्या नहीं कर सकते। ? उनके पास तो बहुत बड़ी शक्ति है, उनकी भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। सराक क्या थे? क्या हो गये हैं? उनके लिये समाज को क्या करना चाहिये ? इस बाबत पत्रकार ही तो बतायेंगे। पत्रकारों को वहाँ जाना चाहिये। सराक क्षेत्र के इतिहास, पुरातत्व का संकलन करना चाहिये। मैं एक बात बताना चाहता हूँ कि सराक जाति के पूर्वज तांबे के उत्खनन एवं शोधन की कला में माहिर थे। उनके तांबे के सिक्के चलते थे, जो वहाँ बहुलता से मिले हैं। उनके व्यापार में ये सिक्के चलते थे। इसके अलावा लोढ़ी जि. रांची एवं अन्य कई ग्रामों में जैन शिल्प की दृष्टि से बहुमूल्य मूर्तियाँ मिलती हैं। जैन इतिहास के प्राचीनतम साक्ष्य यदि कहीं मिलते हैं एवं मिलेंगे तो जनवरी 99 अर्हत् वचन,

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