Book Title: Arhat Vachan 1999 01
Author(s): Anupam Jain
Publisher: Kundkund Gyanpith Indore

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Page 67
________________ संक्षिप्त आख्या अर्हत् वचन आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव : शिक्षा एवं दर्शन (कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दार राष्टीय संगोष्ठी. करुक्षेत्र - जनवरी 16 - 17, 1999 - अनुपम जैन * परम पूज्य उपाध्याय मुनि श्री गुप्तिसागरजी के सान्निध्य एवं पूज्य गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से संस्कृत एवं प्राच्य विद्या संस्थान, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र द्वारा भगवान ऋषभदेव के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में 16- 17 जनवरी 1999 के मध्य द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्घाटन एवं समापन सत्रों के अतिरिक्त 3 तकनीकी सत्रों में कुल 23 शोधपत्र प्रस्तुत किये गये। मूर्धन्य जैन विद्वान प्रो. धर्मचन्द्र जैन के कुशल संयोजन एवं डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा के सुन्दर समन्वय से संगोष्ठी अत्यन्त सफल रही। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुनिलालजी रंगा की संकल्पशक्ति, नेतृत्व क्षमता एवं गहन रूचि की समागत विद्वानों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की। उद्घाटन सत्र - 16.1.99, प्रात: 10.30 से 2.30 तक, श्रीमद्भगवद्गीता सदन, कुरुक्षेत्र अध्यक्षता : प्रो. मुनिलाल रंगा, कुलपति - कुरुक्षेत्र वि.वि., कुरुक्षेत्र मुख्य अतिथि : प्रो. वाचस्पति उपाध्याय, कुलपति - लालबहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विद्यापीठ, दिल्ली मुख्य वक्ता : प्रो. आर.आर. नांदगांवकर, पूर्व कुलपति, निदेशक - गणिनी ज्ञानमती शोधपीठ, हस्तिनापुर (मेरठ) विशिष्ट अतिथि : प्रो. एस. पी. सिंह, कुलपति - वीर कुंवरसिंह वि.वि., आरा डॉ. नेमीचन्द जैन, संपादक- तीर्थंकर, इन्दौर श्री राजीव जैन, चंडीगढ़ संचालन : डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा, कुरुक्षेत्र मंगलाचरण : ब्र. सुमन शास्त्री, संघस्थ - उपाध्याय मुनि श्री गुप्तिसागरजी इस सत्र में कुरुक्षेत्र के बुद्धिजीवियों के अतिरिक्त अम्बाला, सोनीपत, चण्डीगढ़ आदि स्थानों के 1000 से अधिक जैन धर्मावलम्बी वि.वि. के प्रतिष्ठित सभागार श्रीमद्भगवद्गीता सदन में उपस्थित थे। पूज्य उपाध्याय श्री ने वि.वि. के संस्कृत एवं प्राच्य विद्या संस्थान में जैन अध्ययन की स्थापना में आर्थिक सहयोग प्रदान करने हेतु एक ट्रस्ट के गठन की घोषणा की। इस ट्रस्ट में 10,00,000300 रु. के अंशदान की तत्काल घोषणा की गई तथा डॉ. नीलम जैन, सहारनपुर को ट्रस्ट एवं वि.वि. के मध्य समन्वय हेतु संयोजिका मनोनीत किया गया। स्वागत डॉ. धर्मचन्द्र जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. इन्दु शर्मा द्वारा किया गया। प्रथम सत्र - 16.1.99, अपरान्ह 3.30 से 5.15 तक, सीनेट हॉल, कुरुक्षेत्र अध्यक्षता : प्रो. प्रेमसुमन जैन, संकायाध्यक्ष - मानविकी संकाय, मोहनलाल सुखाड़िया वि.वि., उदयपुर संचालन : डॉ. रणवीरसिंह, कुरुक्षेत्र वि.वि., कुरुक्षेत्र वक्ता : 1. डॉ. अनुपम जैन, इन्दौर : 'जैनधर्म के विषय में कतिपय भ्रांतियाँ एवं वास्तविकताएँ 2. डॉ. रमेश पाण्डेय, दिल्ली : भगवान ऋषभदेव की वर्ण व्यवस्था का आधार - कर्म 3. डॉ. नेमीचन्द जैन, इन्दौर : ‘भगवान ऋषभदेव और पर्यावरणिक नैतिकता' 4. डॉ. प्रेमसुमन जैन, उदयपुर : आत्मधर्म प्रणेता भगवान ऋषभदेव द्वितीय सत्र - 17.1.99, प्रात: 9.30 से 11.00 तक, सीनेट हॉल, कुरूक्षेत्र अध्यक्षता : प्रो. राजकुमार नांदगांवकर, निदेशक -गणिनी ज्ञानमती शोधपीठ , हस्तिनापुर संचालन : डॉ. श्रीकृष्ण शर्मा, कुरुक्षेत्र वि.वि., कुरुक्षेत्र अर्हत् वचन, जनवरी 99

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