Book Title: Agam 30 mool 03 Uttaradhyayana Sutra Sthanakvasi
Author(s): Amarmuni
Publisher: Padma Prakashan

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Page 634
________________ ती सचित्र उत्तराध्ययन सूत्र चतुस्त्रिंश अध्ययन [482] (2) Varnadvara (colour) The colour of black soul-complexion (Krishna leshya) is black like - rain bearing black cloud, buffalo-horn, soap-nut seed (arishtak; Sapindus detergens), khanjan (cartgrease or eye of wagtail) or anjan (collyrium or pupil of eye). (4) नीला-ऽसोगसंकासा, चासपिच्छसमप्पभा। वेरुलियनिद्धसंकासा, नीललेसा उ वण्णओ॥५॥ नीले अशोक वृक्ष जैसा, चास पक्षी के पंख की प्रभा जैसा, स्निग्ध वैडूर्य रत्न के समान (अतिनील)-नीललेश्या का रंग है॥ ५॥ The colour of blue soul-complexion (Neel leshya) is deep blue like-blue Ashoka tree (Jonesia Asoka), glow of feathers of blue jay (Chaash; Corarias indica) or polished Lapis-lazuli. (5) अयसीपुष्फसंकासा, कोइलच्छदसन्निभा। पारेवयगीवनिभा, काउलेसा उ वण्णओ॥६॥ अलसी के पुष्प, कोयल के पंख के समान, कबूतर की ग्रीवा (गर्दन) (कुछ नीला और कुछ . लाल) जैसा रंग कापोतलेश्या का है॥६॥ The colour of pigeon-blue (Kaapot) soul-complexion is reddish-blue like-linseed flowers, feathers of cuckoo or neck of pigeon (red mixed blue). (6) हिंगलयधाउसंकासा, तरुणाइच्चसन्निभा। सुयतुण्ड-पईवनिभा, तेउलेसा उ वण्णओ॥७॥ हिंगुल, धातु-गेरू के समान, तरुण (उदय होते हुए) सूर्य के सदृश, तोते की चोंच, प्रज्वलित दीपक की प्रभा जैसा लाल-तेजोलेश्या का वर्ण होता है॥७॥ The colour of fiery-red (Tejas) soul-complexion is red like-vermilion, red ochre, rising sun, beak of a parrot and glow of a lamp. (7) हरियालभेयसंकाया, हलिद्दाभेयसन्निभा। सणासणकुसुमनिभा, पम्हलेसा उ वण्णओ॥८॥ हरिताल (हड़ताल) के टुकड़े जैसा, हल्दी के टुकड़े के समान, सन और असन के पुष्प के समान पीला रंग पद्मलेश्या का होता है॥ ८॥ The colour of lotus-yellow (Padma) soul-complexion is yellow like-a piece of orpiment, a piece of turmeric and flowers of San (Indian hemp; Crotolaria juncea) and those of Asan (Vijayasar; Terminalia tomentosa). (8) संखंककुन्दसंकासा, खीरपूरसमप्पभा। रययहारसंकासा, सुक्कलेसा उ वण्णओ॥९॥ शंख अंकरत्न (स्फटिक मणि के समान एक विशेष रत्न), कुन्द के पुष्प जैसा, दूध की धारा जैसा और चाँदी के हार के समान श्वेत वर्ण शुक्ललेश्या का होता है॥ ९॥

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