Book Title: Agam 15 Pannavana Uvangsutt 04 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 15
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir पनवणा91-11१२ तितरसपरिणता वि जाव महुररसपरिणता वि फासतो कक्खडफासपरिणता वि जाव उसिणफासपरिणता वि संठाणतो परिमंडलसंठाणपरिणता विजाव आयतसंठाणपरिणता दि जे संठाणतो परिमंडलसंठाणपरिणता ते वण्णतो कालवण्णपरिणता वि जाव सुक्किलवण्णपरिणता वि गंधतो सुब्मिगंधपरिणता वि दुबिगंधपरिणता वि रसतो तित्तरसपरिणता वि जाव महुरसपरिणता दि फासतो कक्खडफासपरिणता वि जाव लुक्खफासपरिणता वि जे संठाणओ वट्टसंठाणपरिणता ते वण्णओ कालवण्णपरिणता वि जाव सुक्किलवण्णपरिणता वि गंधतो सुब्मिगंधपरिणता वि दुब्मिगंधपरिणता वि रसओ तित्तरसपरिणता वि जाव महुररसपरिणता विफासओकक्खडफासपरिणता विजाय लुक्खफासपरिणता वि, जे संठाणतो तंससंठाणपरिणता ते दण्णतो कालवण्णपरिणता वि जाव सुक्किलदण्णपरिणया वि गंधओ सुमिगंधपरिणता वि दुब्मिगंधपरिणता वि रसओ तित्तासपरिणता दि जाव महुरासपरिणता वि फासओ कक्खडफासपरिणता वि जाव लुक्खफासपरिणता वि, जे संठाणओ चउरंससंठाणपरिणता ते यण्णतो कालवण्णपरिणता वि जाव सुकिकलवण्णपरिणता वि गंधओ सब्मिगंधपरिणता वि दुब्मिगंधपरिणता वि रसतो तित्तरसपरिणता वि जाव महुररसपरिणता वि फासतो कक्खडपासपरिणता विजाव लुक्खफासपरिणता वि, जे संठाणतो आयतसंठाणपरिणता ते वण्णतो कालवष्णपरिणता वि जाव सुक्किलवण्णपरिणता विगंधतो सुब्भिगंधपरिणता वि दुभिगंधपरिणता वि रसतो तित्तरसपरिणता वि जाव पररसपरिणता वि फासतो कक्खडफासपरिणता वि जाव लुक्खफासपरिणता विसेत्तं रूविअजीवपत्रवणा सेत्तं, अजीवपत्रवण्णा |14 (१४) से किं तं जीवपन्नवणा जीवपन्नवणा दुविहा पन्नता तं जहा-संसारसमावण्णजीवपन्नवणा य असंसारसमावण्णजीवपत्रवणा या५0-5 (१५) से किं तं असंसारमावण्णजीवपन्नवणा, असंसारमावण्णजीवपन्नवणा दुविहा-अनंतरसिद्ध-असंसारसमावण्णजीवपन्नवणाय परंपरसिद्धअसंसाररसमावण्णजीवपन्नवणाया। (१६) से किं तं अनंतरसिद्ध-असंसारसमावण्णजीवपन्नवणा, अनंतरसिद्ध-असंसारसमावण्णजीवपत्रवणा पत्ररसविहा पन्नता तंजहा-तित्यसिद्धा अतित्थसिद्धा तित्थगरसिद्धा अतित्यगरसिद्धा सयंबुद्धसिद्ध पत्तेयबुद्धसिद्धा बुद्धबोहियसिद्धा इत्यीलिंगसिद्धा पुरिसलिंगसिद्धा नपुंसकलिंगसिद्धा सलिंगसिद्धा अण्णलिंगसिद्धा गिहिलिंगसिद्धा एगसिद्धा अनेगसिद्धा से तं अनंतरसिद्ध-असंसारसमावण्णजीवपन्नवणा 1७1-7 (१७) से किं तं परंपरसिद्ध असंसारसमावण्णजीवपन्नवणा, परंपरसिद्ध-असंसारसमावण्णजीवपन्नवणा अनेगविहा पन्नत्ता तं जहा-अपढमसमयसिद्धा दुसमयसिद्धा तिसमवसिद्धा चउसमपसिद्धाजावसंखेजसमयसिद्धा असंखेजसमयसिद्धा अनंतसमयसिद्धा से तं परंपरसिद्धअसंसारसमावण्णजीवपन्नवणासेतं असंसारसमावण्णजीवपन्नवणा1418 (१८) से किं तं संसारसमावण्णजीवपन्नवणा संसारसमावण्णजीवपनवणा पंचविहा एगिदियसंसारसमावण्णजीवपन्नवणा बेइंदियसंसारसमावण्णजीवपन्नवणा तेइंदियसंसारसमावण्णजीवपन्नवणा चउरिदियसंसारसमावण्णजीवपत्रवणापंचेंदियसंसारसमावण्णजीवपत्रणा !९।-9 (१९) से किंतं एगेंदियसंसारसमादपणजीवपत्रवणा एगेदियसंसारसमावण्णजीवपत्रवणा पंचविहापत्रत्तातंजहा-पुदविकाइयाआउकाइया तेउकाइयावाउकाइया वणस्सइकाइया११०1-10 For Private And Personal Use Only

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