Book Title: Siddhant Rahasya Part 01
Author(s): Devchandra Upadhyay
Publisher: Gangji Virji Shah

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Page 206
________________ स ग्यनी (ते केवली समुद्रात वखने होय ) अयोगो के. अलाहारकनी स्थिति, ज. ने उ. अंतर्मुहूर्तनी. १५४ नो स्थिति, ज० एक समय अने उ० अंतर्मुनी. अभाषक त्रण प्रकारना छे:-१ अनादि-अनंत, २ सादि-| कायस्थिति अनत अने ३ सादि-सांत. तेमां सादि-सांतनी स्थिति, ज. अंतर्मु. अने उ. वनस्पति कालनी. १६ परित्तना विचार ॥१९८॥ बे भेदः-१ कायपरित्त (प्रत्येक शरीरी) अने २ संसारपरित्त. कायपरित्तनी स्थिति, ज० अंतर्मु० अने उ. पृथ्वी जीवना काल जेटली ( असंख्यात कालचक्रनी). संसारपरित्तनी ज० अंतर्मु. अने उ. देशेउणी अर्द्धपुद्गल परावर्तनी. अपरित्तना बे भेद छे-१ कायअपरित्त अने २ संसार अपरित्त. कायअपरित्तनी स्थिति, ज. अंतमु० अने उ. वनस्पति-कालनी. संसार अपरित्तना बे भेदः-१ अनादि-अनंत अने २ अनादि-सांत. नोपरित्त नोअपरित्त (सिद्ध )नी स्थिति, सादि--अनंत. १७ पर्यासनी स्थिति, ज. अंतर्मु० अने उ. पृथक्त्वशत सागरोपम अधिकनी. अपर्याप्तनी ज. अने उ. अंतर्मुनी. नोपर्याप्त नोअपनी सादि-अनंत. १८ सूक्ष्मनी स्थिति, ज. अंतर्मु. अने उ० पृथ्वी-काल प्रमाण, क्षेत्रथी असंख्याता लोकाकाश प्रमाण. यादरनी स्थिति, ज. अंतर्मु. अने र० असंख्यातो काल. क्षेत्रथी अंगुलना असंख्यातमा भाग प्रमाण. नोसूक्ष्म नोवानी सादि-अनंत, १९ संज्ञीनी स्थिति, ज. अंतर्मु. अने उ० शतपृथक्त्व सागर अधिक. असंज्ञीनी ज० अंतर्मु. अने उ० वनस्पतिकालनी. नोसंज्ञी नोअसंज्ञीनी मादि-अनंत. २० भव्य सिद्धिकनी स्थिति, अनादि-सांत. अभव्यसिद्धिकनी अनादि-अनंत अने नोभवसि० नो अभवसि. नी सादि-अनंत. २१ पांचे अस्तिकायनी स्थिति, अनादि-अनंत

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