Book Title: Shrutsagar 2014 07 Volume 01 02
Author(s): Kanubhai L Shah
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba

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Page 31
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra श्रुतसागर १. ओठां - दृष्टांत विना २. पाखइ - सायरसुतभगिनीपतिपुत्र, वयरीसुतवाहनभख्यसत्रु । तेहनी गति जिहां तेहनुं रत्न, तेह वार जाणो कविरत्न | ७१ ॥ = कबुं : केधुं (?) ४. घोटिक = घोड़ो हाथी पुष्य नक्ख्यत्रि कीधो रास, सीलवंत नो हुं हुं दास । उपगछपति गुरु गोयम समान, विजयदेवसूरि युगहनधान ।। ७२ ।। तास पाट प्रगट्यो जिम भांण, विजयसिंहसूरि युगहप्रधान ! वाचक भानुचंद्रनो शीस देवचंद्र प्रणमई निशदीश । ७३ ।। ॥ इति श्री पृथ्वीचंद्रकुमार रास संपूर्णम् ।। कठिन शब्दार्थ ५. मयगल ६. सारे (रि) = सोगलांवाजी ७. रामति रगत ८. चांति = ( चिंता ?) ९. परट -M = = १०. तिय ११. तंति एक प्रकारनुं वार्जित्र १२. ऊसनो = खिन्न, क्षीण १३. विलविलती विलाप विलखी १४. = शरत स्त्री = १५. रीव १६. जंत १७. आलि १८. अजाडी = माया १९. धीवर माछीगार = लाचार, अनुपाय पोकार जीव फोगट, व्यर्थ - — २०. देसाउरी २१. खांति www.kobatirth.org = परदेशी 29 = क्षमा २२. गरवंत = धनवान २३. गरथ - धन, नाणुं २४. गय = गति २५. वंकुडी = बांकुं ३०. दाव = मांगणी २६. वारु = सुंदर, उत्तम २७. केलवइ = तैयार कर, रचचुं २८. आहिं = स्थान २९. माहिरइ (माहेरुं) = लग्नविधिनो मंडप = Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir जुलाई २०१४ ३१. वही हिमां ३२. मनरली = मनना उमंगथी ३३. पडवडी = जाण ३४. आखडी = नियम, बाधा नठारु, हलकुं ३५. पाडूया ३६. पणि दुकानमा ३७. पस्तां = पीस्ता ३८. टोडर For Private and Personal Use Only आग्रह, आग्रहपूर्वकनी = ३९. विहचवा ४०. सणीजा - = = उमरानी कलगी वहेंचवा स्नेहीजन

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