Book Title: Vyakhyapragnaptisutram Part 01
Author(s): Divyakirtivijay
Publisher: Shripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust

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Page 459
________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-१ // 431 // 6 शतके उद्देशक:३ महाश्रवाधिकारः। सूत्रम् 237 ज्ञानावरणीयादीनां बन्धकाः स्त्यादि संयतादीत्यादिप्रश्नाः। किं सम्मदिट्ठी बं० मिच्छट्ठिी बं० सम्मामिच्छदिट्ठी बं०?, गोयमा! सम्मद्दिट्ठी सिय बं० सिय नो बं० मिच्छदिट्ठी बं० सम्मामिच्छदिट्ठी बं०, एवं आउगवजाओ सत्तवि, आऊए हेडिल्ला दो भयणाए सम्मामिच्छदिट्ठीन बं० // 20 णाणावरणिज्जं किं सण्णी बं॰ असन्नी बं० नोसण्णीनोअसण्णी बं?, गोयमा! सन्नी सिय बं० सिय नोब० असन्नी बं० नोसन्नीनोअसन्नी न बं०, एवं वेदणिज्जाउगवजाओ छ कम्मप्पगडीओ, वेदणिज्जं हेट्ठिल्ला दो बंधंति, उवरिल्ले भयणाए, आउगं हेट्ठिल्ला दो भयणाए, उवरिल्लोन बं० ॥२१णाणावरणिज्जं कम्मं किं भवसिद्धीए बं० अभवसिद्धीए बं० नोभवसिद्धीएनोअभवसिद्धीए बं?, गोयमा! भवसि० भयणाए अभवसि० बं० नोभवसि नोअभवसि न बं०, एवं आउगवजाओ सत्तवि, आउगं हेडिल्ला दो भयणाए उवरिल्लो न बं० // 22 णाणावर किं चक्खुदंसणी बं० अचक्खुदंस० ओहिदंस० केवलदं?, गोयमा! हेट्ठिल्ला तिन्नि भयणाए उवरिल्ले ण बं०, एवं वेदणिज्जवजाओ सत्तवि, वेदणिज्जं हेडिल्ला तिन्नि बंधंति केवलदसणी भयणाए॥ 23 णाणावर कम्मं किं पञ्जत्तओ बं० अपज्जत्तओ बं० नोपज्जत्तएनोअपज्जत्तए बं०?, गोयमा! पज्जत्तए भयणाए, अपज्जत्तए बं०, नोपज्जत्तएनोअपज्जत्तए न बं०, एवं आउगवजाओ, आउगं हेडिल्ला दो भयणाए उवरिल्ले न बं० // 24 नाणावर० किं भासए बं० अभासए०?, गोयमा! दोवि भयणाए, एवं वेदणियवजाओ सत्त, वेदणिज्जं भासए बं० अभासए भयणाए // 25 णाणावर० किं परित्ते बं० अपरित्ते बं० नोपरित्तेनोअपरित्ते बं०?, गोयमा! परित्ते भयणाए अपरित्ते बं० नोपरित्तेनोअपरित्ते न बं०, एवं आउगवजाओ सत्त कम्मप्पगडीओ, आउए परित्तोवि अपरित्तोवि भयणाए, नोपरित्तोनोअपरित्तो न बं० // 26 णाणावरणिज्जं कम्मं किं आभिणिबोहियनाणी बं० सुयनाणी ओहिनाणी मणपज्जवनाणी केवलनाणी बं०?, गोयमा! हेट्ठिल्ला चत्तारि भयणाए केवलनाणी न बं०, एवं वेदणिज्जवजाओ सत्तवि, वेदणिज्ज़ हेट्ठिल्ला चत्तारि बंधंति केवलनाणी भयणाए / 27 णाणावरणिचं किंमतिअन्नाणी बं० सुय० विभंग०?, गोयमा! (सव्वेवि) आउगवजाओसत्तवि // 43 //

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