Book Title: Vyakhyapragnaptisutram Part 01
Author(s): Divyakirtivijay
Publisher: Shripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
View full book text ________________ श्रीभगवत्यङ्ग श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-१ // 517 // 7 शतके उद्देशक: 6 आयुष्काधिकारः। सूत्रम् 288 दुःषमादुःषमाऽऽरके मनुष्याणामाकारभावप्रत्यावतार प्रश्राः / परूढनह-केस-मंसुरोमा, काला, खर-फरुस-झामवन्ना, फुट्टसिरा, कविल-पलियकेसा, बहुण्हारु (णि) संपिनद्धदुईसणिज्जरूवा संकुडिय-वलीतरंग-परिवेढियंगमंगा जरापरिणतव्व थेरगनरा, पविरल-परिसडिय-दंतसेढी, उब्भडघड(डब्भडघाडामुहा)मुहा विसमनयणा वंकनासा वं(क)ग-वली-विगयभेसणमुहा कच्छू-कसराभिभूया, खर-तिक्खनख-कंडूइयविक्खयतणू दहुकिडिभ-सिंझ(सिज्झ) फुडिय-फरुसच्छवी चित्तलंगा टोलागति-विसमसंधिबंधण-उक्कुडु-अट्ठिग-विभत्त-दुब्बल(ला)कुसंघयण-कुप्पमाण-कुसंठिया कुरूवा कुठाणासण-कुसेज-कु(दु)-भोइणो असुइणो अणेगवाहिपरिपीलियंगमंगा खलंतवेज्झ (वेब्भ)लगती निरुच्छाहा सत्तपरिवज्जिया विगयचिट्ठा(चेट्ट) नट्ठतेया अभिक्खणं सीय-उण्ह-खर-फरुस-वायविज्झडिया मलिणपंसुरयगुंडियंगमंगा बहुकोहमाणमाया बहुलोभा असुहदुक्खभोगी ओसन्नं धम्मसण्णसम्मत्तपरिब्भट्ठा उक्कोसेणं रयणिप्पमाणमेत्ता सोलसवीसतिवासपरमाउसो पुत्तनत्तुपरियालपणय (परिपालण)बहुला गंगासिंधूओ महानदीओ वेयहुंच पव्वयं निस्साए बावत्तरिंनिओदा बीयं बीयामेत्ता बिलवासिणो भविस्संति // 20 ते णं भंते! मणुया किमाहारमाहारें(रहिं)ति?, गोयमा! तेणं काले णं 2 गंगासिंधूओ महानदीओ रहपहवित्थराओ(त्थारा) अक्खसोयप्पमाणमेत्तं जलं वोज्झिहिति(हंते) सेवि यणंजले बहुमच्छ कच्छभाइन्ने णोचेवणं आउयबहुले भविस्सति, तएणं ते मणुया सुरुग्गमणमुहत्तंसिय सूरत्थमणमुहत्तंसिय बिलेहितो निद्धाइ(हिंति) रत्ता (बिलेहिंतो) मच्छकच्छभे थलाइंगाहेहिंति रत्ता सीयायवतत्तएहिं मच्छकच्छएहिं एक्कवीसं वाससहस्साई वित्तिं कप्पेमाणा विहरिस्संति // 21 तेणं भंते! मणुया निस्सीला निग्गुणा निम्मेरा निप्पच्चक्खाणपोसहोववासा ओसण्णं मंसाहारा मच्छा० खोद्दा० कुणिमा० कालमासे कालं किच्चा कहिंगच्छिहिंति? कहिं उववजि०?, गोयमा! ओसन्नं नरगतिरिक्खजोणिएसु उववजं(जिहिं)ति, 22 ते णं भंते! सीहा वग्घा वगा दीविया अच्छा तरच्छा परस्सरा निस्सीला तहेव जाव कहिं उववन्जि.?, गोयमा! ओ(उ)सन्नं // 517 //
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