Book Title: Vyakhyapragnaptisutram Part 01
Author(s): Divyakirtivijay
Publisher: Shripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust

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Page 511
________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-१ // 483 // ॥अथ सप्तमं शतकम्॥ ॥सप्तमशतके प्रथमोद्देशकः॥ व्याख्यातं जीवाद्यर्थप्रतिपादनपरंषष्ठं शतम्, अथ जीवाद्यर्थप्रतिपादनपरमेव सप्तमशतं व्याख्यायते, तत्र चादावेवोद्देशकार्थसङ्ग्रहगाथा आहार 1 विरति 2 थावर ३जीवा 4 पक्खी य५ आउ 6 अणगारे 7 / छउमत्थ 8 असंवुड 9 अन्नउत्थि 10 दस सत्तमंमि सए / ७शतके उद्देशकः१ आहारकानाहारकवक्तव्यताऽऽधिकारः। सूत्रम् 260 जीवानामनाहारकाल्पहारकताकाल प्रश्नाः / 1 आहारे त्यादि, तत्राऽऽहार त्ति, आहारकानाहारकवक्तव्यतार्थः प्रथमः 1 विरइ त्ति प्रत्याख्यानार्थो द्वितीयः 2 थावर त्ति वनस्पतिवक्तव्यतार्थस्तृतीयः 3 जीव त्ति संसारिजीवप्रज्ञापनार्थश्चतुर्थः 4 पक्खी यत्ति खचरजीवयोनिवक्तव्यतार्थः पञ्चमः 5 आउत्ति, आयुष्कवक्तव्यतार्थः षष्ठः 6 अणगार त्ति, अनगारवक्तव्यतार्थः सप्तमः 7 छउमत्थ त्ति छद्मस्थमनुष्यवक्तव्यतार्थोऽष्टमः 8 असंवुड त्ति, असंवृतानगारवक्तव्यतार्थो नवमः 9 अन्नउत्थिय त्ति कालोदायिप्रभृतिपरतीर्थिकवक्तव्यतार्थो दशमः 10 इति॥ 2 तेणं कालेणं 2 जाव एवं व०- जीवेणं भंते! कं समयमणाहारए भवइ?, गोयमा! पढमे समए सिय आहारए सिय अणाहारए बितिए समए सिय आहा. सिय अणाहा० ततिए समए सिय आहा० सिय अणाहा० चउत्थे समए नियमा आहारए, एवं दंडओ, जीवा य एगिदिया य चउत्थे समए सेसा ततिए समए॥३जीवेणं भंते! कंसमयंसव्वप्पाहा० भ०?, गोयमा! पढमसमयोववन्नए वा चरमसमए भवत्थे वा एत्थ णंजीवेणं सव्वप्याहा० भ०, दंडओभाणियव्वोजाव वेमाणियाणं॥सूत्रम् 260 // // 483 //

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