Book Title: Vyakhyapragnaptisutram Part 01
Author(s): Divyakirtivijay
Publisher: Shripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust

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Page 509
________________ 6 शतके श्रीभगवत्य श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-१ // 481 // धारणस्य सर्वेषां सद्भावादिति ॥२५६॥जीवाधिकारात्तद्गतमेवान्यतीर्थिकवक्तव्यतामाह 9 अन्नउत्थियाणंभंते! एवमाइक्खंति जाव परूवेंति एवं खलु सव्वे पाणा भूया जीवा सत्ता एगंतदुक्खं वेयणं वेयंति, से कहमेयं भंते! एवं?, गोयमा! जन्नं ते अन्नउ० जाव मिच्छं ते एवमाहंसु, अहं पुण गोयमा! एवमाइक्खामि जाव परूवेमि अत्थेगइया पाणा भूया जीवा सत्ता एगंतदु० वे वेयंति आहच्च सायं, अत्थे० पाणा भूया जीवा सत्ता एगंतसायं वे वेयंति आहच्च अस्सायं वेयणं वेयंति, अत्थे० पाणा भूया जीवा सत्ता वेमायाए वे वेयंति आहच्चसायमसायं / 10 सेकेणटेणं०?, गोयमा! ने० एगंतदु० वे वेयंति (आहच्चसायमसायं) आहच्चसायं, भवणवइ वाणमंतर जोइस वेमाणिया एगंतसायं वे वेयंति आहच्च असायं, पुढविक्काइया जाव मणुस्सा वेमायाए वेयणं वेयंति आहच्चसायमसायं, से तेणटेणं०॥सूत्रम् 257 // 9 अन्नउत्थिये त्यादि, आहच्च सायं ति कदाचित्सातां वेदनाम्, कथम्? इति चेदुच्यते उववाएण व सायं नेरइओ देवकम्मुणा वावि / 10 आहच्च असायं ति देवा आहननप्रियविप्रयोगादिष्वसातां वेदनां वेदयन्तीति, वेमायाए त्ति विविधया मात्रया कदाचित्सातां कदाचिदसातामित्यर्थः // 257 // जीवाधिकारादेवेदमाह 11 नेर० णं भंते! जे पोग्गले अत्तमायाए आहारैति ते किं आयसरीरखेत्तोगाढे पो० अत्तमा० आहारेंति अणंतरखेत्तोगाढे पो० अत्तमा० आहारेंति परंपरखेत्तोगाढे पो० अत्तमा० आहा०?, गोयमा! आयसरीरखेत्तोगाढे पो० अत्तमा० आहा० नो अणंतरखेत्तोगाढे पो० अत्तमा० आहा० नो परंपरखेत्तोगाढे, जहा ने तहा जाव वेमाणियाणं दंडओ॥ सूत्रम् 258 // उद्देशक: 10 अन्ययूथवक्तव्यताऽऽधिकारः। सूत्रम् 257 प्राणादीनामेकान्तेन सुखादिवेदन प्रश्नाः / सूत्रम् 258 नैरयिकादीनामनन्तरपरंपरक्षेत्रावगाढपुद्गलाहार प्रश्नाः / सूत्रम् 259 केवलिन इन्द्रियैर्ज्ञानदर्शन प्रश्नाः / // 481 // 0उत्पादे वा सातं नैरयिको देवक्रियया, अपिशब्दात्तीर्थकरजन्मादिदिनेषु वेदयते।

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