Book Title: Vyakhyapragnaptisutram Part 01
Author(s): Divyakirtivijay
Publisher: Shripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust

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Page 487
________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-१ // 459 // 6 शतके उद्देशक:६ भव्याधिकारः। सूत्रम् 244 सप्तपृथिवी ॥षष्ठशतके षष्ठोद्देशकः॥ व्याख्यातो विमानादिवक्तव्यताऽनुगतः पञ्चमोद्देशकः, अथ षष्ठस्तथाविध एव व्याख्यायते, तत्र १कतिणंभंते! पुढवीओपण्णत्ताओ?,गोयमा! सत्त पुढवीओप०, तंजहा- रयणप्पभाजाव तमतमा, रयणप्पभादीणं आवासा भाणियव्वा (जाव) अहेसत्तमाए, एवं जे जत्तिया आवासा ते भाणियव्वा र जाव कति णं भंते! अणुत्तरविमाणा प०?, गोयमा! पंच अणुत्तरवि०प०, तंजहा- विजए जाव सव्वट्ठसिद्धे॥सूत्रम् 244 // ३जीवेणं भंते! मारणंतियसमुग्धाएणं समोहए समोहणित्ता जे भविए इमीसे रयणप्पभाए पु. तीसाए निरयावाससयसहस्सेसु अन्नयरंसि निरयावासंसि नेरइयत्ताए उववजित्तए से णं भंते! तत्थगते चेव आहारेज वा परिणामेज वा सरीरंवा बंधेजा?, गोयमा? अत्थेगतिए तत्थगए चेव आहा० वा परि० वा सरीरं वा बंधेज वा, अत्थे तओ पडिनियत्तति, ततो पडित्ता इहमागच्छति रत्ता दोच्चंपि मारणंतियसमु० समोहणइ रत्ता इमीसे रयणप्पभाए पु० तीसाए निरयावाससयसह अन्नयरंसि निरयावासंसि नेरइयत्ताए उववजित्तए, ततो पच्छा आहा० वा परि० वा सरीरंवा बं० एवं जाव अहेसत्तमा पु०।४जीवेणं भंते! मारणंतियसमु० समोहए रत्ता जे भविए चउसट्ठीए असुरकुमारावाससयसहस्सेसु अन्नयरंसि असुरकुमारावासंसि असुरकुमारत्ताए उववजित्तए जहा नेर० तहा भाणियव्वा जाव थणियकु०।५ जीवे णं भंते! मारणंतियसमु० समोहए रत्ता जे भविए असंखेजेसु पुढविकाइयावाससयसह० अण्णयरंसि पुढविकाइयावासंसि पुढविकाइयत्ताए उववजि० से णं भंते! मंदरस्स पव्वयस्स पुरच्छिमेणं केवतियं गच्छेज्जा के० पाउणेज्जा?, गोयमा! लोयंतं ग० लोयंतं पा०, 6 से णं भंते! तत्थगए चेव आहा० वा परि० वा सरीरं वा बं०?, गोयमा! अत्थे० तत्थगए चेव आहा० वा परि० वा सरीरं वा बं० अत्थे० तओ पडिनियत्तति रत्ता इह हव्वमागच्छइ रत्ता दोच्चंपि मारणंतियसमु० पंचानुत्तर| विमान |प्रश्नाः / सूत्रम् 245 मारणान्तिकसमुद्धातसमवहतः नैरयिकादिषूत्पत्तुंभव्यस्याऽऽहार शरीरपरिणमनलोकान्तप्राप्तिसामर्थ्यादि प्रश्नाः / |459 //

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