Book Title: Thulibhaddni Shilveli
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
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( ५७ । ने भन्नरी घघुमडपाये, तो साछीहून बेटेरोपहुंगाशाशशीहरब्ले. गंगारावरसे, वागा समुच मर्याध मूडेरे ए पवनें ने उनान यषडोसे,नक्षत्र भारश यूरेगहूंगाडतो पाहुंताहारे वशना, वागा सुंघरी मानले |सायुगरानो पाउते वर्धगयो रातें, हवेनथी भनकुँअयुरोराडूंचासोजाउन्नेमा भय रोवे, वागा पावऽयन यो पानुरेपशेडर श्या पाजंड उरेछे, दागेनही भुनेतानोरेराहून पनि मुनिवरेंत्रेवीमेश्याने,वागा। पानी मोनडी तोरेगहने माहारी वंदना होन्ने,जघ्यरतन मिजोवरेहूंगाहप | हानागरी नातिनो साउदो श्री थूसिलरजएगारपश्या वयपाथी नविन ग्यो,समता थछतेणीवार पराभनवराज या वशीया, ऐसंघरीसुएवाता शिो
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