Book Title: Prachin Jain Itihas Sangraha Part 02 Jain Rajao ka Itihas
Author(s): Gyansundar Maharaj
Publisher: Ratnaprabhakar Gyanpushpamala

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Page 11
________________ [१०] शान्ति-क्या प्रमाण है ? कान्ति-उन्होंने एक तालाब पर छत्री बनाई थी जिसका शिलालेख आज भी मौजूद है। शान्ति-छत्रसिंह के पिता का क्या नाम था ? कान्ति-लक्ष्मणसिंह। शान्ति-क्या सबूत ? कान्ति-आप तीर्थों की यात्रा पधारे उस समय पंडों को कुछ दान दिया था वो पंडों की बही में उसी समय का लिखा. मिलता है ! शान्ति-लक्ष्मणसिंह के पिता का क्या नाम था ? कान्ति-मुझे मालूम नहीं शान्ति-आपको मालूम न होगा पर लक्षमणसिंह के पिता हुए तो होंगे न ? कान्ति-सबूत नहीं मिलती है शान्ति-अरे भाई ! सबूत नहीं मिलती होगी पर इतना तो आप अनुमान प्रमाण से जान सकते हो कि बिना पिता पुत्र हो नहीं सकता है तो लक्षमणसिंह के पिता तो अवश्य होगा ही ? शान्ति-कुछ भी हो जब तक इतिहास प्रमाण नहीं मिले वहाँ तक मैं किसी को मानने के लिये तैयार नहीं हूँ। शान्ति-बलिहारी है आपके इतिहास की कि आप बिना इतिहास पुत्र के पिता मानने को तैयार नहीं। कान्ति-श्राप कुछ भी कहे पर मैं, इतिहास प्रमाण के सिवाय गप्पें मानने को किसी हालत में तैयार नहीं हूँ। ......

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